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जबलपुर। छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड में हुई 30 बच्चों की मौत को गंभीर और संवेदनशील मामला मानते हुए हाईकोर्ट ने डॉ. प्रवीण सोनी, उनकी पत्नी सहित दो अन्य की जमानत आवेदन खारिज कर दिए हैं। हाईकोर्ट जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल ने अपने आदेश में कहा है कि आरोपी को जमानत का लाभ दिया जाता है तो जनता का न्याय से भरोसा बहुत कम हो जाएगा। कफ सिरप एक्शन के संबंध में जानकारी होने के बावजूद भी डॉक्टर कमीशन लेकर बच्चों को दूषित कफ सिरप प्रिस्क्राइब करता रहा। केन्द्र सरकार के द्वारा नोटिफिकेशन के बावजूद भी आवेदक ने चार साल से कम बच्चों को फिक्स्ड डोज कंपाउंड सिरप दिया गया। सह आरोपियों ने आवेदक डॉक्टर को बचाने के लिए कफ सिरप से जुड़े सबूत नष्ट कर दिए।
छिंडवाड़ा सिरप कांड मामले में गिरफतार डॉ. प्रवीण सोनी, उनकी पत्नी ज्योति सोनी सहित दो अन्य की तरफ से हाईकोर्ट में जमानत आवेदन दायर किया गया था। आवेदन में कहा गया था कि आवेदक डॉ. प्रवीण सोनी कम्युनिटी हेल्थ सेंटर परासिया, जिला छिंदवाड़ा में चाइल्ड स्पेशलिस्ट के तौर पर पदस्थ थे और विगत पांच अक्तूबर से न्यायिक हिरासत में हैं। कफ सिरप को बनाने में उसका कोई रोल नहीं था। वह विगत 20 साल से यह दवा लिख रहे हैं। कफ सिरप श्रीसन फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड ने बनाया और बेचा था। उन्हें इस बात की जानकारी नही थी कि उसमें कोई मिलावट की गई है। आवेदक ने जिस समय दवा लिखी थी उस पर कोई रोक नहीं थी। दवा पर पहली बार 4 अक्टूबर 2025 को रोक लगाई गई थी। बिना जांच के प्रैक्टिशनर डॉक्टर के खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज नहीं किया जाना चाहिए।

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