
शीर्ष न्यायालय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के विवादित फैसले को पलटा, फटकार भी लगाई
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस विवादित फैसले को बदल दिया है, जिसमें हाईकोर्ट ने कहा था कि पायजामे का नाड़ा खींचना और ब्रेस्ट पकडऩा रेप की कोशिश नहीं है। देश के शीर्ष न्यायालय ने इलाहाबाद हाई कोर्ट को फटकार लगाते हुए कहा कि पायजामे का नाड़ा खोलना बलात्कार की कोशिश ही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ये फैसला 17 मार्च 2025 को सुनाया था।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने जस्टिस जॉयमाल्या बागची और एनवी अंजारिया के साथ कहा कि यौन अपराधों के मामलों में फैसले के लिए कानूनी तर्क और सहानुभूति दोनों की जरूरत होती है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ब्रेस्ट पकडऩा और पायजामे का नाड़ा खींचना रेप की कोशिश के बराबर है। कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस विवादित आदेश को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि ये सिर्फ रेप करने की तैयारी है। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और एन वी अंजारिया की बेंच ने कहा कि विवादित ऑर्डर को क्रिमिनल ज्यूरिस्प्रूडेंस के तय सिद्धांतों के साफ तौर पर गलत इस्तेमाल की वजह से रद्द किया जाता है। कोर्ट ने 10 फरवरी को यह ऑर्डर एक सुओ मोटो याचिका पर दिया था, जिसमें उसने इलाहाबाद हाई कोर्ट के ऑर्डर का संज्ञान लिया था। इसमें कहा गया था कि सिर्फ ब्रेस्ट पकडऩा और पायजामे का डोरा खींचना रेप का अपराध नहीं है। हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए शीर्ष अदालत ने प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट के तहत दो आरोपियों के खिलाफ रेप की कोशिश के असली कड़े चार्ज को बहाल कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जो फैक्ट्स बताए गए हैं, उन्हें देखते हुए, हम हाई कोर्ट के इस नतीजे से सहमत नहीं हो सकते कि आरोप सिर्फ रेप के अपराध को करने की तैयारी के हैं।
