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प्रश्नपत्रों को पुलिस अभिरक्षा और अधिकृत वाहनों के बजाय निजी गाड़ियों से परीक्षा केंद्रों तक भेजा

कुशीनगर। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में हाईस्कूल व इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा की शुरुआत से ठीक पहले जिले में परीक्षा की गोपनीयता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि प्रश्नपत्रों को पुलिस अभिरक्षा और अधिकृत वाहनों के बजाय निजी गाड़ियों से परीक्षा केंद्रों तक भेजा गया। पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद प्रशासनिक तंत्र में हलचल है।
जिस प्रश्नपत्र को स्ट्रांग रूम से कड़ी सुरक्षा में निकालकर पुलिस निगरानी में केंद्रों तक पहुंचाया जाना चाहिए था, वह निजी वाहनों से ढोया जाता दिखाई दिया। यह दृश्य ‘सुरक्षित और पारदर्शी परीक्षा’ के दावों पर सीधा प्रश्नचिह्न लगाता है। सवाल उठ रहा है कि यह महज लापरवाही है या नियमों की जानबूझकर अनदेखी?
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की परीक्षा संचालन नियमावली के अनुसार प्रश्नपत्रों को सीलबंद स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रखा जाता है। वितरण के समय अधिकृत अधिकारी की उपस्थिति, पुलिस अभिरक्षा में परिवहन, अधिकृत वाहन का उपयोग तथा पूरी प्रक्रिया का विधिवत अभिलेखीकरण और वीडियोग्राफी अनिवार्य है। इन प्रावधानों का उद्देश्य परीक्षा की गोपनीयता को अक्षुण्ण रखना और किसी भी प्रकार की पेपर लीक या छेड़छाड़ की आशंका को समाप्त करना है।
इसके बावजूद यदि प्रश्नपत्र निजी वाहनों से, वह भी बिना पुलिस सुरक्षा के भेजे गए, तो कई गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। क्या पुलिस विभाग को पूर्व सूचना दी गई थी? क्या अधिकृत वाहन और रूट प्लान स्वीकृत था? क्या वितरण रजिस्टर और सुरक्षा अभिलेख पूर्ण हैं? यदि नहीं, तो यह परीक्षा प्रोटोकॉल की खुली अवहेलना मानी जाएगी।
जिले में चर्चा है कि यह पूरा घटनाक्रम जिला विद्यालय निरीक्षक श्रवण कुमार गुप्त और परीक्षा लिपिक सुभाष प्रसाद यादव की जानकारी में हुआ। हालांकि इस संबंध में संबंधित अधिकारियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। मामले की जानकारी प्रभारी जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी वंदिता श्रीवास्तव को दिए जाने की बात भी कही जा रही है। अब देखना यह है कि प्रशासन तथ्यात्मक जांच कर जिम्मेदारी तय करता है या मामला फाइलों में सिमट कर रह जाता है।
चर्चा यह भी है कि अधिकृत बस और पुलिस अभिरक्षा के बजाय निजी वाहनों के उपयोग के पीछे परिवहन मद के बजट को लेकर अनियमितता की आशंका हो सकती है। यदि ऐसा है, तो मामला केवल लापरवाही का नहीं बल्कि वित्तीय गड़बड़ी का भी बन सकता है।
गौरतलब है कि जिले में इससे पूर्व भी परीक्षा संचालन को लेकर विवाद सामने आ चुका है, जब एक इंटर कॉलेज में नियमित प्रश्नपत्र के स्थान पर रिजर्व पेपर से परीक्षा कराए जाने का मामला सुर्खियों में रहा था। ऐसे में एक बार फिर उठे ये सवाल परीक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर गहरी चोट माने जा रहे हैं।
बोर्ड परीक्षा लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी संवेदनशील प्रक्रिया है। इसकी पवित्रता पर जरा-सी भी आंच पूरे सिस्टम की साख को प्रभावित कर सकती है। अब सबकी निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।

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