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संयुक्त परिवार भले कम हो गए हों लेकिन रिश्तों की भावना बनी रहनी चाहिए

लखनऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष को लेकर कार्यक्रमों की श्रृंखला में संघ प्रमुख मोहन भागवत लखनऊ दौरे पर हैं। इस दौरान भागवत ने बुधवार को कहा कि संघ बीजेपी का रिमोट कंट्रोल नहीं है। संघ के स्वयंसेवक बीजेपी में जाते हैं और पार्टी में सियासी तौर पर आगे भी बढ़े हैं, लेकिन यह कहना गलत है कि संघ बीजेपी को चलाता है। लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में भागवत ने बीजेपी और आरएसएस के संबंधों पर बात की। उन्होंने कहा कि संघ के स्वयंसेवक अलग-अलग क्षेत्रों में जाते हैं, उसमें से कुछ स्वयंसेवक राजनीति में भी सक्रिय होते हैं, लेकिन यह कहना गलत है कि संघ बीजेपी को चलाता है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि बीजेपी का विरोध करने वाले लोग ही आरएसएस का विरोध करते हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मोहन भागवत ने परिवार और संस्कार पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवार भले कम हो गए हों, लेकिन रिश्तों की भावना बनी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सप्ताह में कम से कम एक दिन परिवार को साथ बैठना चाहिए। बच्चों को संस्कार घर और स्कूल दोनों से मिलते हैं। संघ प्रमुख ने हिंदू समाज में अपार शक्ति है, लेकिन स्वार्थ में फंसा है। यदि समाज एकजुट हो जाए तो देश को आगे बढ़ाने की क्षमता रखता है। जाति व्यवस्था को पुराना बताते हुए उन्होंने कहा कि अब जाति नाम की कोई व्यवस्था नहीं रहनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पहले यह काम के आधार पर थी, लेकिन समय बदल चुका है। जाति की दीवारें टूट रही हैं। भागवत ने कहा कि हम सब भारत माता की संतान हैं। रंग, रूप या जाति अलग हो सकती है, लेकिन अपनापन बना रहना चाहिए। इसी भावना से छुआछूत जैसी बुराई खत्म हो सकती है। जाति व्यवस्था अब पुरानी हो चुकी है। जाति नाम की कोई व्यवस्था अब रहनी नहीं चाहिए। मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि असली चिंता यह होनी चाहिए कि मंदिरों की व्यवस्था और नियमित पूजा-पाठ की जिम्मेदारी कौन संभालेगा। उन्होंने उदाहरण दिया कि सिख समाज अपने गुरुद्वारों का संचालन व्यवस्थित ढंग से करता है। धर्माचार्यों और समाज को इस दिशा में आगे आना चाहिए।

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