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कोलकाता। कलकत्ता हाईकोर्ट ने विवाह के वादे और शारीरिक संबंधों के कानूनी पहलुओं पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि दो वयस्कों के बीच लंबे समय तक आपसी सहमति से शारीरिक संबंध रहे हों और बाद में किन्हीं कारणों से शादी नहीं हो पाती या रिश्ते में कड़वाहट आ जाती है, तो उसे बलात्कार की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। जस्टिस चैताली चटर्जी (दास) ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि शादी के वादे के खिलाफ बलात्कार का मामला तभी बनता है जब पुरुष का इरादा शुरुआत से ही महिला को धोखा देने का रहा हो। अदालत ने जोर देकर कहा कि जिस तरह से महिला और पुरुष एक-दूसरे के साथ व्यवहार कर रहे थे, वह साफ तौर पर आपसी सहमति को दर्शाता है।
इस मामले के तथ्यों के अनुसार, महिला और पुरुष के बीच रिश्ता साल 2017 में शुरू हुआ था और 2022 तक चला। इस दौरान दोनों ने पति-पत्नी की तरह व्यवहार किया और दीघा, गोवा, पार्क स्ट्रीट और खड़गपुर जैसे विभिन्न स्थानों के होटलों में साथ समय बिताया। महिला ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने उसे कुछ नशीला पदार्थ पिलाकर पहली बार यौन संबंध बनाए और बाद में शादी का वादा कर इसे जारी रखा। महिला ने यह भी आरोप लगाया था कि रिश्ते के दौरान वह गर्भवती हो गई थी और आरोपी के वादे पर भरोसा करते हुए उसने गर्भपात कराया। हालांकि, जब आरोपी ने शादी से इनकार कर दिया, तो फरवरी 2022 में पश्चिम मिदनापुर में पुलिस शिकायत दर्ज कराई गई।
हाईकोर्ट ने इन आरोपों का बारीकी से विश्लेषण करने के बाद आरोपी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि संबंध बनाने के शुरुआती समय से ही आरोपी का इरादा धोखाधड़ी करने का होना चाहिए था ताकि महिला को यौन संबंध बनाने के लिए प्रेरित किया जा सके। लेकिन इस मामले में, पीड़िता ने लगभग 5-6 वर्षों तक रिश्ता जारी रखा और विभिन्न पर्यटन स्थलों पर आरोपी के साथ स्वेच्छा से गई।

कई वर्षों में आरोपी के खिलाफ कोई शिकायत नहीं की और रिश्ता जारी रखा

कोर्ट ने टिप्पणी की कि इतने लंबे समय तक साथ रहने और साथ घूमने-फिरने की गतिविधियों से यह कहीं भी प्रतीत नहीं होता कि महिला किसी भी प्रकार की गलतफहमी या दबाव में थी।
अदालत ने गर्भपात के मुद्दे पर भी गौर किया और कहा कि यह पीड़िता और आरोपी दोनों की आपसी सहमति से किया गया कृत्य था। न्यायाधीश ने कहा कि अगर किसी महिला ने पिछले कई वर्षों में आरोपी के खिलाफ कोई शिकायत नहीं की और रिश्ता जारी रखा, तो यह आपसी समझ और साथ रहने की इच्छा को प्रदर्शित करता है, न कि धोखाधड़ी से उकसावे को। यह फैसला उन मामलों में एक बड़ी कानूनी स्पष्टता प्रदान करता है जहाँ ब्रेकअप या शादी न होने की स्थिति में सहमति से बने संबंधों को आपराधिक रूप देने का प्रयास किया जाता है। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि रिश्ते की विफलता को आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता जब तक कि धोखे का प्रमाण ठोस न हो।

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