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महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में हुआ आचार्य छत्तीसी विधान
हटा /महायोगी, राष्ट्रीय संत आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का जन्मदिवस नगर के चारों मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान के साथ हुए। प्रातः सभी मंदिरों में अभिषेक, शांतिधारा, पूजन के साथ आचार्य श्री का पूजन भी हुआ, जिसमें श्रावकों के द्वारा अर्घ्घ समर्पित करते हुए मंगल आरती की।
हटा नगर में पावन वर्षायोग कर रही आर्यिका रत्न श्री मृदुमति माता जी एवं आर्यिका श्री निर्णय मति माता जी के मार्गदर्शन में श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर एवं श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन त्रिमूर्ति मंदिर में आचार्य छत्तीसी विधान का आयोजन किया गया।
श्री महावीर मंदिर में आर्यिका मृदुमति माता जी ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि आचार्य श्री का सानिध्य सौभाग्य से मिलता है, उनकी दिनचर्या सभी तपस्वियों के लिए एक खुली पाठशाला की तरह है, उनके तप, त्याग, तपस्या का वर्णन तो अब इतिहास बन गया है।
जिन्होने केवल धर्म प्रभावना ही नहीं बल्कि शिक्षा, हस्तकरघा, गौशाला जैसे कार्यो को भी आगे बढाया है। आचार्य ने कभी भी किसी भी प्रकार का अपना दर्द श्रावकों को भी नहीं बताया। आहारचर्या को देखकर सभी आश्चर्यचकित रहते थे। उनके द्वारा लिखित साहित्य आने वाली पीढी को दिशा निर्देशित करते रहेगें।
आर्यिका श्री निर्णयमति माता जी के द्वारा त्रिमूर्ति मंदिर में विधान कराया गया। इस अवसर पर बढी संख्या में भक्तजन उपस्थित रहे।

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