हटा /शरद पूर्णिमा पर महिलाओं ने व्रत रखकर मावा के लड्डुओं का लगाया भोग महिलाओं ने घर पर तुलसी के पेड़ किना लक्ष्मी, विष्णु भगवान और चंद्र देव की तस्वीर या मूर्ति स्थापित की।
पूजा में अक्षत, गंगा जल, धूप, दीपक, कपूर, फूल, सुपारी, पान के पत्ते और खोबा से बने लड्डू आदि पूजन सामग्री शामिल कर भगवान के दर्षन कर पुण्य अर्जित किया आज के दिन की मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ के पास चन्द्रमा आकर सिर पर विराजमान होते है एवं रात्रि में अमृत बर्षा की जाती है सनातन काल से चली आ रही।
इस परंपरा मे समस्त देवालयो मे एवं घरो मे भगवान की झांकी को सजाकर
महाप्रसाद के रूप मे भक्तो को दूध का वितरण किया जाता है वहीं महिलाएं अपने पति की रक्षा व पुत्र के स्वास्थ की कामना के लिए व्रत धारण करती है शरद पूर्णिमा को मां लक्ष्मी के प्राकट्योत्सव के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन धन के देवी मां लच्मी समुद्र मंथन से उत्पन्न हुई थीं। इसके साथ ही द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी में महारास किया था और इससे प्रसन्न होकर चंद्रमा ने अमृत वर्षा की थी।नगर के गौरीषंकर मंदिर बालाजी मंदिर दिवाले वालो के मंदिर मे सायंकाल से ही भक्तो का जाना शुरू हुआ एवं भगवान के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

