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गिरफ्तार कांग्रेस कार्यकर्ताओं को 29 अप्रैल को हर हाल में पेश करने निर्देश
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा एवं जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के नाम से वायरल फर्जी पत्र के मामले में गिरफ्तार कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को कोर्ट में पेश न करने पर राजस्थान पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पूर्व में दिए गए स्पष्ट आदेश का पालन नहीं करने पर सख्त नाराजगी जताई| पुलिस की ओर से कहा गया कि किया है कि चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और विनय सराफ की डिवीजन बेंच के समक्ष आज बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने स्पष्ट आदेश के बावजूद आरोपियों को पेश नहीं करने पर नाराजगी जताई। पुलिस की ओर से मिस कम्यूनिकेशन का हवाला दिया गया। कोर्ट ने राजस्थान पुलिस को दो दिन का समय देते हुए निर्देश दिया कि निखिल, बिलाल और ईनाम को अगली सुनवाई 29 अप्रैल को हर हाल में कोर्ट के समक्ष पेश किया जाए। साथ ही उनकी गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेज और सीसीटीवी फुटेज भी प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। तीनों कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद उनके परिजनों ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। आरोप है कि उन्हें बिना उचित प्रक्रिया के हिरासत में लिया गया। बताया जा रहा है कि वसुंधरा राजे के नाम से एक कथित पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर सवाल उठाए गए थे। बाद में इस पत्र को फर्जी बताया गया। इसके बाद राजस्थान पुलिस ने भोपाल पुलिस के सहयोग से कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया।
वरिष्ठ अधिवक्ता तन्खा ने भी उठाए सवाल………..
वरिष्ठ अधिवक्ता मप्र के पूर्व महाधिवक्ता राज्य सभा सांसद विवेक तन्खा ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए है। श्री तंखा ने कहा है कि साइबर पुलिस ने तीनों को करीब 30 घंटे तक बिना उचित कारण हिरासत में रखा, जो गैरकानूनी है। तन्खा के अनुसार, कथित पत्र 15-16 अप्रैल से सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हो रहा था, लेकिन 18 अप्रैल को इसे फर्जी बताते हुए कार्रवाई की गई, जो संदेह पैदा करती है।

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