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ओमती पुलिस को नए सिरे से मामला दर्ज करने आदेश
जबलपुर । उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसले में यह स्पष्ट किया है कि न्यायिक आदेशों का पालन महज औपचारिकता निभाने या दिखावा मात्र नहीं हो सकता। अदालत ने थाना ओमती, जबलपुर में दर्ज एक प्राथमिकी (एफआईआर) को अपूर्ण, भ्रामक और अदालत के आदेश की भावना के विरुद्ध बताते हुए निरस्त कर दिया तथा इसे पुनः सही ढंग से दर्ज करने का आदेश दिया।
न्यायमूर्ति बी.पी. शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश याचिकाकर्ता वीरेन्द्र पाण्डेय की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ता स्वयं उच्च न्यायालय में कार्यरत हैं तथा उनका वैवाहिक विवाद चल रहा है। न्यायालय ने पहले ही तलब कर लिया था थाना प्रभारी को उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व न्यायालय ने प्राथमिकी में गंभीर कमियाँ तथा अभियुक्तों के गलत पते दर्ज किए जाने को गंभीरता से लेते हुए थाना ओमती के थाना प्रभारी एवं प्राथमिकी दर्ज करने वाले एएसआई भल्लू राम चौधरी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान दोनों अधिकारी न्यायालय में पेश हुए, जिसके बाद विस्तृत तर्क सुनकर न्यायालय ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था।
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उसके वैवाहिक रिश्तेदारों ने एक आपराधिक पुनरीक्षण प्रस्तुत किया, जिसमें उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार कार्यालय के नाम से फर्जी लिफाफा तैयार कर यह दर्शाया गया कि याचिकाकर्ता को नोटिस मिल चुका है। इसी फर्जीवाड़े के आधार पर एकपक्षीय आदेश प्राप्त कर लिया गया। बाद में जब याचिकाकर्ता को इस कथित फर्जीवाड़े की जानकारी हुई, तब उन्होंने रजिस्ट्रार हाइ कोर्ट के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की। शिकायत पर रजिस्ट्रार जनरल के निर्देशानुसार जिला न्यायाधीश (चतुर्थ), जबलपुर द्वारा प्रारंभिक जांच कराई गई, जिसमें संबंधित लिफाफे के फर्जी होने की पुष्टि हुई। इसके पश्चात प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जबलपुर ने अपने पत्र के माध्यम से याचिकाकर्ता को एफआईआर दर्ज कराने अथवा सक्षम न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता प्रदान की।
याचिकाकर्ता ने थाने में शिकायत दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। तब उन्होंने न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष परिवाद प्रस्तुत किया। मजिस्ट्रेट ने धारा 156(3) दण्ड प्रक्रिया संहिता के तहत थाना ओमती को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।
प्राथमिकी में अपराधियों का गलत पता लिखना अक्षम्य अनियमितता है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता असीम त्रिवेदी, आनंद शुक्ल , विनीत टेहेंगुनिया , प्रशांत सिरमोलिया एवं शुभम पाटकर ने पैरवी की।

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