
जबलपुर। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष सोमवार को ओबीसी आरक्षण मामला सुनवाई के लिए लगा। इस संबंध में एक साथ 86 याचिकाओं की सुनवाई होनी है। कोर्ट ने पहले दिन सायं चार बजकर 35 मिनिट से पांच बजकर 10 मिनिट तक सुनवाई की। इस दौरान सभी पक्षों से अंडरटेकिंग ली कि कौन कितने समय तक बहस करेगा। इसके बाद कोर्ट ने निर्धारित किया कि सर्वप्रथम ओबीसी आरक्षण के विरुद्ध याचिकाकर्ताओं के वकीलों को सुना जाएगा। इसके बाद राज्य शासन और फिर ओबीसी आरक्षण के पक्ष में याचिकाकर्ताओं के वकीलों को सुना जाएगा। मंगलवार को सुबह 11 बजे से आगे की सुनवाई होगी।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 में अशिता दुबे व अन्य की ओर से दायर याचिका में ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण बढ़ाकर 27 प्रतिशत किए जाने को चुनौती दी गई थी। इसके बाद से लगातार ओबीसी आरक्षण बढ़ाने के पक्ष और विपक्ष में सैकड़ों याचिकाएं दायर हुईं। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी, ओबीसी के विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, ओबीसी वर्ग के अधिवक्ता वरुण ठाकुर, मप्र शासन की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता केएम नटराजन पैरवी के लिए आगे आए।
सुप्रीम कोर्ट से वापस आए हैं मामले ..
दरअसल, पूर्व में मप्र शासन ने ओबीसी से जुड़े प्रकरण सुप्रीम कोर्ट स्थानांतरित करा लिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी, 2026 को इन मामलों को वापस हाई कोर्ट को ट्रांसफर कर दिया था। जिसके बाद से सुनवाई को लेकर जिज्ञासा बनी हुई थी।
