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संतोष वर्मा के साथ एडीजे रहे रावत के अलावा उस समय के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अमन भूरिया को भी आरोपी बनाया था

चर्चित आइएएस अफसर संतोष वर्मा मामले में है आरोपी
इन्दौर। अपर सत्र न्यायाधीश अशोक भारद्वाज की कोर्ट ने इंदौर में पदस्थ रहे पूर्व सीजेएम अमन भूरिया की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। पूर्व सीजेएम अमन भूरिया को चर्चित आइएएस संतोष वर्मा फर्जीवाड़े मामले में आरोपी बनाया गया है जिसमें न्यायालयीन अभिलेखों की कूट रचना की गई थी। कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका इस टिप्पणी के साथ खारिज की कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि कूटरचना और न्यायालय के अभिलेख में हेर-फेर गंभीर अपराध है। अपर लोक अभियोजक योगेश जायसवाल के अनुसार यह पूरा मामला संक्षेप में इस प्रकार है कि आइएएस संतोष वर्मा के खिलाफ महिला ने लसूड़िया थाने में पहले से शादीशुदा होने के बावजूद उसके साथ धार मंदिर में शादी करने, गर्भपात कराने के साथ मारपीट की धाराओं में केस दायर किया था। ये मामला वर्मा के प्रमोशन को रोक रहा था। इस केस के दो फैसले सामने आए थे। एक फैसला वर्मा ने प्रमोशन के लिए लगाया था, जिसमें वर्मा ने खुद को बरी होना बताया था, जबकि कोर्ट रिकॉर्ड में एक फैसला था जिसमें उनके द्वारा आपसी सहमति से मामले का निपटारा होने का था। रावत ने पुलिस में शिकायत की थी। हाईकोर्ट ने आगे की जांच के लिए पुलिस को सौप दिया था। 2021 में पुलिस ने केस दर्ज किया। संतोष वर्मा के साथ एडीजे रहे रावत के अलावा उस समय के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अमन भूरिया को भी आरोपी बनाया था। जिसके बाद भूरिया ने जिला कोर्ट में अग्रिम जमानत का आवेदन लगाया। कोर्ट ने आदेश में लिखा है कि केस डायरी से साफ है कि भूरिया की आरोपी संतोष वर्मा के नंबर पर कई बार बात हुई है। भूरिया सीजेएम के तौर पर पदस्थ थे और आरोप गंभीर है तो उनकी भूमिका को कम नहीं माना जा सकता है।

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