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मैं से हम की साधना के साथ शुरू हुए संघ के शिक्षा वर्ग लिंगा में गूंजा राष्ट्र निर्माण का संदेश 536 शिक्षार्थी व 60 शिक्षक वर्ग में शामिल

छिंदवाड़ा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महाकौशल प्रांत का लिंगा स्थित माताजी निर्मला देवी सहजयोग ट्रस्ट में संघ शिक्षा वर्ग सामान्य व्यवसायी व विद्यार्थी का शुभारंभ शनिवार को हुआ। यह दोनों वर्ग 1 जून तक चलेंगे। संघ के पदाधिाकारी विनय सोलंकी ने बताया कि व्यवसायी एवं विद्यार्थी वर्गों वर्ग में 536 शिक्षार्थी शामिल हैं। जिसमें व्यवसायी वर्ग के 202 व विद्यार्थी वर्ग 334 शिक्षार्थी शामिल है। वर्ग में शिक्षार्थी को प्रशिक्षण देने 60 शामिल हैं। वर्ग के शुभारंभ अवसर पर मनोज जैन एवं महाकौशल प्रांत के सह प्रांत कार्यवाह अनिल चंद्रवंशी ने भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया। महाकौशल के सह प्रांत कार्यवाह अनिल चंद्रवंशी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य ईश्वरीय कार्य है और संघ की स्थापना असंगठित हिंदू समाज को संगठित करने के उद्देश्य से डॉक्टर हेडगेवार ने की थी।

उन्होंने शिक्षार्थियों से अध्ययन, अभ्यास, संस्कार और साधना चार सूत्रों को आत्मसात करने का आह्वान किया। वहीं उन्होंने कहा कि संघ का प्रशिक्षण व्यक्ति को ‘मैं’ से ‘हम’ की यात्रा करना सिखाता है। संघ की प्रतिज्ञा में संगठन का ध्येय निहित है और शुद्ध सात्विक प्रेम ही संघ की कार्यपद्धति का आधार है। प्रत्येक स्वयंसेवक को संगठन के प्रति अटूट विश्वास, श्रद्धा और समर्पण रखना चाहिए। उन्होंने शिक्षार्थियों को सामाजिक जीवन में दक्ष एवं संवेदनशील बनने की प्रेरणा दी। वहीं शिक्षार्थी वर्ग का शुभारंभ अरुण सैयाम एवं महाकौशल प्रांत के सह प्रांत प्रचारक श्रवण सैनी ने भारत माता के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। सह प्रांत प्रचारक श्रवण सैनी ने अपने उद्बोधन में कहा कि सभी शिक्षार्थी सुविधा छोडकऱ यहां तप और आत्मविकास के उद्देश्य से आए हैं। उन्होंने बताया कि संघ का प्रशिक्षण नियमित एवं नैमित्तिक दो प्रकार से चलता है और संघ का मूल कार्य किसी भी परिस्थिति में निरंतर चलता रहता है।

सैनी ने कहा कि गीत, खेल और सामूहिक गतिविधियों के माध्यम से स्वयंसेवकों में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता का विकास किया जाता है। उन्होंने शिक्षार्थियों से प्रशिक्षण में पूर्ण मनोयोग से भाग लेने, स्वानुशासन का पालन करने तथा सकारात्मक चिंतन अपनाने का आग्रह किया। साथ ही माता निर्मला देवी के जीवन एवं विचारों को जानने-पढऩे की प्रेरणा भी दी।

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