
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट 21 जुलाई को मेघालय सरकार की याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें पति राजा रघुवंशी की हत्या की आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत को चुनौती दी गई है। सोनम पर पिछले वर्ष हनीमून के दौरान अपने पति की हत्या का आरोप है।
मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी सोनम को पिछले साल जून में अपने कारोबारी पति राजा रघुवंशी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था। यह मामला तब सामने आया जब पिछले साल 23 मई को यह दंपत्ति मेघालय के सोहरा इलाके से लापता हो गया और पिछले साल 2 जून को राजा रघुवंशी का शव एक गहरी खाई से बरामद हुआ। पुलिस का आरोप है कि सोनम ने पैसों के लालच में भाड़े के हत्यारों के साथ मिलकर अपने पति की हत्या की साजिश रची थी।
आरोपी महिला को पहले अधीनस्थ अदालत और फिर मेघालय हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी। उच्च न्यायालय ने पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के उचित लिखित आधार देने में विफलता को न्यायिक विवेक का पूर्ण अभाव बताया था। दरअसल, पुलिस के गिरफ्तारी ज्ञापन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) (हत्या के लिए दंड) की जगह गलती से धारा 403 (बेईमानी से संपत्ति का दुरुपयोग) लिख दिया गया था।
मेघालय सरकार की ओर से दायर याचिका मंगलवार को न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी बी वराले की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई, जिसके बाद आरोपी के वकील के आग्रह पर अगली सुनवाई के लिए 21 जुलाई की तारीख तय की गई। इससे पहले, 9 जुलाई को शीर्ष अदालत ने संकेत दिया था कि वह इस कानूनी सवाल को एक बड़ी पीठ के पास भेज सकती है कि क्या गिरफ्तारी ज्ञापन में केवल टाइपिंग की गलती के कारण गलत कानूनी धारा का उल्लेख करना, किसी की गिरफ्तारी को अमान्य करने और आरोपी को जमानत देने का पर्याप्त आधार हो सकता है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया है कि यह त्रुटि महज लिपिकीय थी और इतने सनसनीखेज मामले में इसे जमानत का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
