
नई दिल्ली। देश में नागरिकों को आपात कानूनी राहत समय पर उपलब्ध कराने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने देश के सभी हाईकोर्टों को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्या उनके यहां रात, छुट्टियों या अन्य आपात परिस्थितियों में मामलों की सुनवाई के लिए विशेष व्यवस्था या आपातकालीन पीठ उपलब्ध है। अदालत ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी है, ताकि पूरे देश में एक समान व्यवस्था विकसित की जा सके। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों पर तत्काल खतरा हो, गिरफ्तारी का जोखिम हो या कोई अन्य गंभीर कानूनी आपात स्थिति उत्पन्न हो, तो उसे अदालत तक पहुंचने के लिए अगले कार्यदिवस का इंतजार नहीं करना पड़ना चाहिए। इसी उद्देश्य से यह पहल की गई है कि संवैधानिक अदालतें जरूरत पड़ने पर 24 घंटे न्यायिक सहायता उपलब्ध करा सकें। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्टों से यह भी पूछा है कि वर्तमान में आपात मामलों की सुनवाई के लिए क्या व्यवस्था लागू है और यदि ऐसी व्यवस्था नहीं है, तो उसे किस प्रकार विकसित किया जा सकता है। माना जा रहा है कि सभी हाईकोर्टों से जवाब मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट इस संबंध में एक समान दिशा-निर्देश जारी कर सकता है। इस पहल का उद्देश्य नागरिकों को आपात परिस्थितियों में त्वरित न्याय उपलब्ध कराना और न्यायपालिका तक पहुंच को अधिक प्रभावी बनाना है।
