ख़ुद अपने खून से सींचा है जब शहीदों ने। तभी तो फूल सी बनकर खिली है आज़ादी। ‘अदीब’ लाखों घरों के दिये बुझे हैं जब। हमारे मुल्क को उस दम मिली है आज़ादी।। ~अदीब दमोही

दमोह । यौमे आज़ादी (स्वतंत्रता दिवस) के अवसर पर दमोह शहर की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी अदबी साहित्यिक संस्था, बज़्मे अहसन की जानिब से एक ख़ूबसूरत, बहुत ही शानदार और भव्य “एक शाम वतन के नाम” मुशायरे का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के सभी शायरों/कवियों ने एक से बढ़कर एक ग़ज़लें सुनाकर समां बांध दिया और सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सभी शायरों की शायरी को बहुत ही मुहब्बतों से सुना गया और ख़ूब सराहा गया। “एक शाम वतन के नाम” मुशायरे में नदीम सुल्तान, मुस्तफ़ा अकमल, शोएब दमोही, अयाज़ सुल्तानी, अब्दुल अनआम, एडवोकेट इरफ़ान उस्मानी, फ़ैसल रज़ा, साहिल दमोही, मौलाना इरफ़ान नूरी, अदीब दमोही, ताबिश नैयर, डॉ. नाज़िर दमोही, कलीम दानिश, डॉ. गणेश राय, उस्ताद ताहिर दमोही, शकील अमजद सुल्तानी, डॉ. रफ़ीक़ आलम और रमेश तिवारी साहिब सभी ने एक से बढ़कर एक अशआर सुनाकर माहौल में जान डाल दी और सभी सुनने वालों को तालियाॅं बजाने पर मजबूर कर दिया। ख़ुद अपने खून से सींचा है जब शहीदों ने। तभी तो फूल सी बनकर खिली है आज़ादी। ‘अदीब’ लाखों घरों के दिये बुझे हैं जब। हमारे मुल्क को उस दम मिली है आज़ादी।। ~अदीब दमोही

प्रोग्राम का बहुत ही शानदार और सफल संचालन ताहिर दमोही ने किया और सदारत (अध्यक्षता) शहज़ाद ख़ान (पूर्व सभापति) ने बख़ूबी अदा की। इस अवसर पर इक़बाल पार्षद और शहज़ाद ख़ान ने प्रोग्राम के बारे में अपनी बात रखी और बच्चों की तालीम पर विशेष ज़ोर देने की अपील की। प्रोग्राम में एज़ाज़ आलम कुरैशी (सदर-जश्ने ईद मिलादुन्नबी शहर कमेटी), अब्दुल वहीद क़ुरैशी, शाहिद नूर, डॉ. मोहन आदर्श, उवैद गौरी, नियाज़ कुरैशी, इक़बाल पार्षद, नसीम अहमद सर, आरिफ़ ख़ान (ज़क़ात फ़ाउन्डेशन), शाहिद ख़ान (मंटू वकील), एडवोकेट शाहिद रिज़वी, मुबीन कुरैशी, वकील कुरैशी, डॉ. सोनू खान, अल्तमश ज़मज़म, फिरोज़ रोज़ और भी बहुत अधिक संख्या में श्रोताओं की उपस्थिति रही। बज़्म के डिसीप्लेन इंचार्ज इरफ़ान नूरी ने सभी का आभार व्यक्त किया।
