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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद हुए बार काउंसिल चुनाव के नतीजों ने तृणमूल कांग्रेस को राजनीतिक रूप से कुछ राहत दी है। राज्य बार काउंसिल की 23 सीटों में से टीएमसी समर्थित उम्मीदवारों ने 15 सीटों पर जीत दर्ज की है। चुनाव में कुल 75 उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें 23 को टीएमसी, 22 को भाजपा और 12 को वाम दलों का समर्थन प्राप्त था।
बार काउंसिल का चुनाव सीधे तौर पर विधानसभा चुनाव जैसा राजनीतिक जनादेश नहीं माना जाता, लेकिन उम्मीदवारों को राजनीतिक दलों का समर्थन मिलने के कारण इसका राजनीतिक महत्व बढ़ गया है। खासकर ऐसे समय में जब 2026 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी को बड़ा झटका लगा और भाजपा ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। टीएमसी 80 सीटों पर सिमट गई।
विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद बार काउंसिल में टीएमसी समर्थित उम्मीदवारों की 15 सीटों पर जीत को पार्टी के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। यह नतीजा पार्टी के समर्थकों और संगठन के लिए मनोवैज्ञानिक राहत देने वाला हो सकता है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक तनाव और नेताओं-कार्यकर्ताओं पर हमलों के आरोपों के बीच टीएमसी खेमे के लिए यह परिणाम इस बात का संकेत माना जा सकता है कि समाज के कुछ प्रभावशाली वर्गों में पार्टी की पकड़ अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
वकीलों के चुनाव में स्थानीय बार एसोसिएशन, उम्मीदवारों के व्यक्तिगत संपर्क, पेशेवर छवि, स्थानीय मुद्दे और व्यक्तिगत स्वीकार्यता जैसे कई कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए 23 में से 15 सीटों पर टीएमसी समर्थित उम्मीदवारों की जीत पार्टी के लिए निश्चित तौर पर सकारात्मक खबर है।

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