
नई दिल्ली। केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में विरोध कर रहे आदिवासी परिवारों के समर्थन में आवाज उठाई है। उन्होंने परियोजना के लिए जमीन गंवाने वाले लोगों को उचित मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास दिए जाने की मांग की है। राहुल गांधी ने 19 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि आदिवासी समुदाय की इस लड़ाई में वह और कांग्रेस उनके साथ खड़े हैं।
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में केन-बेतवा परियोजना के खिलाफ सत्याग्रह कर रहे आदिवासियों की समस्याओं और मांगों को उन्हीं की जुबानी सामने रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के आदिवासी लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और उन्हें अन्याय तथा दमन का सामना करना पड़ रहा है। उनके मुताबिक, इन लोगों को सम्मान और समर्थन मिलना चाहिए।
राहुल गांधी इससे पहले जुलाई में भी केन-बेतवा परियोजना का मुद्दा उठा चुके हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कविता और तस्वीरें साझा करते हुए उचित मुआवजे की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों का समर्थन किया था। उन्होंने आदिवासी समुदाय को देश का असली मालिक बताते हुए कहा था कि जल, जंगल और जमीन पर उनका पहला अधिकार है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि परियोजना के लिए जमीन लिए जाने के बावजूद कई आदिवासी परिवारों को उचित मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास नहीं मिला है। उन्होंने मध्य प्रदेश के छतरपुर में अगस्त की शुरुआत में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई की भी आलोचना की थी।
जल सत्याग्रह और भूख हड़ताल का दावा…
कांग्रेस नेता के मुताबिक, केन-बेतवा परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण के विरोध में मध्य प्रदेश के आदिवासी जल सत्याग्रह और भूख हड़ताल कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों की मुख्य मांग रोजगार और आजीविका का स्थायी साधन, उचित मुआवजा और पुनर्वास है। राहुल गांधी ने बीजेपी सरकार पर शांतिपूर्ण विरोध को दबाने के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आदिवासी परिवारों के साथ खड़ी है और उन्हें न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने दोहराया कि प्रभावित लोगों को मुआवजा और पुनर्वास दिया जाना चाहिए।
क्या है केन-बेतवा परियोजना ?
केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना नदी जोड़ो योजना का हिस्सा है। इसका उद्देश्य केन नदी के पानी को बेतवा नदी बेसिन तक पहुंचाकर सिंचाई और जल उपलब्धता को बढ़ाना है। परियोजना का बड़ा हिस्सा मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों से संबंधित है। इसके लिए जमीन अधिग्रहण और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रभावित क्षेत्रों में विरोध भी सामने आया है। राहुल गांधी के ताजा बयान के बाद केन-बेतवा परियोजना को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है। कांग्रेस इसे आदिवासी अधिकारों और पुनर्वास का मुद्दा बता रही है, जबकि परियोजना को बुंदेलखंड में सिंचाई और जल संकट से निपटने की महत्वपूर्ण योजना के रूप में देखा जाता है।
