रायसेन बरेली के साइकिल वितरण मामले में ईओडब्ल्यू महानिदेशक से व्यक्तिगत हलफनामा तलब

जबलपुर । म.प्र. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विवेक अग्रवाल तथा न्यायाधीश अवनीन्द्र कुमार सिंह की संयुक्तपीठ ने रायसेन जिले की वर्ष 2013 की साइकिल वितरण योजना से जुड़े कथित अनियमितता मामले में सुनवाई करते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की कार्यप्रणाली पर नाराजगी व्यक्त करते हुए सवाल किया कि जब दो दिसंबर, 2021 को अभियोजन की मंजूरी मिल चुकी थी, तो वर्ष 2026 तक आरोप पत्र दाखिल क्यों नहीं किया गया। संयुक्तपीठ ने इस संबंध में ईओडब्ल्यू के महानिदेशक को व्यक्तिगत हलफनामा पेश करने के निदेश दिए हैं।
रायसेन के बरेली तहसील की सहायक शिक्षक सीमा धाकड़ और उमराव धाकड़ ने याचिका के माध्यम से ईओडब्ल्यू की ओर से दर्ज प्राथमिकी को चुनौती दी गई है। दायर याचिका में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2013 में छात्रों को साइकिल वितरण के लिए उनके खातों में राशि आई थी। संबंधित प्राचार्य ने राशि निकालकर लाभार्थियों को नकद दे दी थी। इसके बाद में ईओडब्ल्यू ने जांच शुरू की।
याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायालय को अवगत कराया गया कि अन्य सह-आरोपियों का विचारण आठ अगस्त, 2023 को समाप्त हो चुका है। वहीं याचिकाकर्ताओं के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी दो दिसंबर, 2021 को मिल गई थी। इसके बावजूद वर्ष 2026 तक आरोप पत्र दाखिल नहीं हुआ। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि ईओडब्ल्यू अधिकारियों की कथित अवैध मांगें पूरी नहीं होने के कारण आरोप पत्र दाखिल करने में देरी हुई। न्यायालय ने कहा कि इतनी लंबी देरी प्रथमदृष्टया जांच अधिकारी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाती है व भ्रष्टाचार की आशंका पैदा करती है। हालांकि संयुक्तपीठ ने आरोपों को सिद्ध नहीं माना है, लेकिन महानिदेशक से पूरे मामले का स्पष्टीकरण मांगा है। महानिदेशक को बताना होगा कि पांच साल से अधिक समय तक मामला लंबित रखने वाले अधिकारी कौन हैं और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई प्रस्तावित की गई है। संयुक्तपीठ ने यह भी पूछा है कि क्या संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। ईओडब्ल्यू महानिदेशक को व्यक्तिगत हलफनामा एक सितंबर, 2026 तक दाखिल करने के निदेश दिए हैं। न्यायालय ने हिदायत दी है कि ऐसा नहीं होने पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने का आदेश दिया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई दो सितंबर, 2026 को नियत की गई है।
