सरकार की ओर से संकट में दी गई मदद नहीं माना जा सकता वसूली योग्य राशि

जबलपुर । वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों की पीड़ित एक बुजुर्ग महिला को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। अदालत ने सीहोर जिला प्रशासन द्वारा करीब 7.24 लाख रुपये की मुआवजा राशि वापस लेने के लिए जारी किए गए आदेश और रिकवरी नोटिस को निरस्त कर दिया है।जस्टिस संजीव कालगांवकर की एकलपीठ ने फैसले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि संकट की घड़ी में सरकार द्वारा तत्काल सहायता के रूप में दी गई राशि को बाद में कानूनी मुआवजे की तरह वापस नहीं मांगा जा सकता। अदालत ने माना कि प्रशासन ने उपलब्ध रिकॉर्ड का उचित परीक्षण किए बिना महिला के खिलाफ वसूली की कार्रवाई की।मामला सीहोर के चर्च ग्राउंड के सामने रहने वाली गुरुचरण कौर रात्रा से जुड़ा है। वर्ष 2014 में उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर प्रशासन की रिकवरी कार्रवाई को चुनौती दी थी।
याचिका के अनुसार, 1984 के दंगों के दौरान उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचा था। दंगा पीड़ितों को राहत और क्षतिपूर्ति दिए जाने के संबंध में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच वर्ष 2006 में आदेश पारित कर चुकी थी। इसी आधार पर गुरुचरण कौर ने 9 मई 2013 को मुआवजे के लिए आवेदन किया।महिला ने आवेदन में पहले मिल चुकी राहत राशि का भी उल्लेख किया था। उन्हें प्रशासन से 5 हजार रुपये की तत्काल राहत मिली थी, जबकि नानावटी आयोग की सिफारिश के आधार पर 45 हजार रुपये की अतिरिक्त राशि भी दी गई थी।
इसके बाद प्रशासन ने आवेदन और रिकॉर्ड की जांच के उपरांत तत्कालीन कलेक्टर स्तर से 7 लाख 23 हजार 800 रुपये की राशि स्वीकृत की और उसका भुगतान भी महिला को कर दिया गया।मामले में बाद में एक शिकायत सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने पहले स्वीकृत और भुगतान की जा चुकी राशि की वसूली की कार्रवाई शुरू कर दी। महिला के खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किया गया और 7.23 लाख रुपये वापस लेने का प्रयास किया गया।प्रशासन की इस कार्रवाई को महिला ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सीताराम गर्ग ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा।हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों का परीक्षण करने के बाद प्रशासन की कार्रवाई को उचित नहीं माना। कोर्ट ने पाया कि संबंधित अधिकारियों ने रिकॉर्ड का समुचित परीक्षण किए बिना ही रिकवरी का आदेश जारी कर दिया था।अदालत ने स्पष्ट किया कि आपदा अथवा संकट के समय पीड़ित व्यक्ति को सरकार की ओर से दी गई तत्काल सहायता मानवीय राहत होती है। ऐसी सहायता को बाद में महज इस आधार पर वापस नहीं मांगा जा सकता कि उसे किसी अन्य मद में प्राप्त राशि से समायोजित किया जाना चाहिए था।
प्रशासन को देना होगा 50 हजार रुपये………..
कोर्ट ने केवल रिकवरी आदेश को ही रद्द नहीं किया, बल्कि प्रशासनिक कार्रवाई के कारण बुजुर्ग महिला को हुई परेशानी और मानसिक प्रताड़ना को भी गंभीरता से लिया। अदालत ने सीहोर जिला प्रशासन को महिला को 50 हजार रुपये बतौर मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं।इस आदेश के साथ हाईकोर्ट ने महिला के खिलाफ जारी 7 लाख 23 हजार 800 रुपये की वसूली संबंधी कार्रवाई पर रोक लगाते हुए रिकवरी आदेश और नोटिस निरस्त कर दिए।
