चार्जशीट दाखिल नहीं होने पर ईओडब्ल्यू के डीजी कोर्ट में हाजिर हुए

जबलपुर । रायसेन जिले के बरेली तहसील में वर्ष 2013 में स्कूली विद्यार्थियों को नि:शुल्क साइकिल वितरण से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जांच में हुई देरी को गंभीरता से लिया है। शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान ईओडब्ल्यू के डायरेक्टर जनरल उपेंद्र जैन व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए।जस्टिस विवेक अग्रवाल एवं जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने मामले में अभियोजन की स्वीकृति मिलने के बावजूद अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने संबंधित विवेचना अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश ईओडब्ल्यू के डायरेक्टर जनरल को दिए हैं।
2021 में मिली अभियोजन स्वीकृति………….
मामले की पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने सवाल उठाया था कि जब प्रकरण में वर्ष 2021 में अभियोजन की स्वीकृति मिल चुकी थी, तो इसके बाद भी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने में इतनी देरी क्यों हुई। अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए ईओडब्ल्यू के डायरेक्टर जनरल को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए थे।
निर्देश के पालन में शुक्रवार को डीजी ईओडब्ल्यू उपेंद्र जैन अदालत के समक्ष उपस्थित हुए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जांच पूरी होने के बावजूद चार्जशीट दाखिल नहीं किए जाने को लेकर संबंधित विवेचक की भूमिका पर नाराजगी जाहिर की और उसके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
2015 में दर्ज हुई थी एफआईआर………….
मामला रायसेन जिले की बरेली तहसील से संबंधित है। सहायक शिक्षक सीमा धाकड़ एवं उमराव धाकड़ की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, वर्ष 2013 में कुछ अभिभावकों ने स्कूली विद्यार्थियों को नि:शुल्क साइकिल उपलब्ध कराने वाली सरकारी योजना में कथित अनियमितताओं को लेकर शिकायत की थी।शिकायत की जांच के बाद ईओडब्ल्यू ने 7 दिसंबर 2015 को एफआईआर दर्ज की थी। एफआईआर में याचिकाकर्ताओं सहित अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज एफआईआर को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया।
चार्जशीट में देरी बनी सुनवाई का प्रमुख मुद्दा………….
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत का मुख्य फोकस इस बात पर रहा कि अभियोजन की आवश्यक स्वीकृति वर्ष 2021 में प्राप्त होने के बावजूद वर्षों तक चार्जशीट दाखिल क्यों नहीं की गई। कोर्ट ने इस देरी को गंभीरता से लेते हुए ईओडब्ल्यू के वरिष्ठ अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से तलब कर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था।
शुक्रवार को हुई सुनवाई में अदालत ने संबंधित विवेचना अधिकारी की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए उसके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिएयाचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता एमआर वर्मा ने पैरवी की। शासन की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के साथ ईओडब्ल्यू के डायरेक्टर जनरल उपेंद्र जैन अदालत में उपस्थित रहे।
