
नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) से गठबंधन करने वाले 20 बागी सांसदों की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा जारी अयोग्यता नोटिस का जवाब देने की दो सप्ताह की समयसीमा हाल ही में समाप्त हो गई, जिसके बाद इन सांसदों ने एक बार फिर दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा है। इसी बीच, इन बागी सांसदों की कोलकाता में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में केवल आधे ही सदस्य शामिल हुए, जिससे उनके खेमे में आंतरिक फूट की अटकलें तेज हो गई हैं।
इन 20 सांसदों के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अयोग्यता याचिका दायर की गई है, जिसमें दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधानों को लागू करने की मांग की गई है। शिकायतें मुख्य रूप से टीएमसी से अलग होकर एनसीपीआई के साथ उनके गठबंधन को लेकर हैं। लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय ने सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के बाद सांसदों को जवाब देने के लिए नोटिस जारी किए थे। रिपोर्टों के अनुसार, सांसदों ने सितंबर की शुरुआत में चार सप्ताह का समय मांगा था, लेकिन उन्हें केवल दो सप्ताह की मोहलत मिली। अब, समयसीमा समाप्त होने के बाद, यह चौथी बार है जब सांसदों ने इस लंबे कानूनी और राजनीतिक विवाद में अतिरिक्त समय की मांग की है। कोलकाता में बागी सांसदों की बुलाई गई बैठक में 20 में से केवल 10 सांसद ही शामिल हो पाए। वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय द्वारा आयोजित इस बैठक का उद्देश्य आगे की कानूनी और राजनीतिक रणनीति पर चर्चा करना था, लेकिन आधे सदस्यों की अनुपस्थिति ने इसमें नया मोड़ ला दिया। काकोली घोष दस्तीदार, सायोनी घोष, यूसुफ पठान, माला रॉय, जून मालिया, पार्थ भौमिक, मिताली बाग, कालीपद सोरेन, देव और असीत माल जैसे प्रमुख नाम बैठक से नदारद रहे, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या बागी सांसदों के भीतर ही कोई नई बगावत पनप रही है। वहीं, सुदीप बंद्योपाध्याय के अलावा अबू ताहिर, खलीलुर रहमान, शर्मिला सरकार, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, शताब्दी रॉय, प्रसून बनर्जी, बापी हलदर, रचना बनर्जी और अरूप चक्रवर्ती बैठक में मौजूद रहे।
हालांकि, बैठक में शामिल सांसदों ने अनुपस्थित सदस्यों को लेकर किसी भी तरह के मतभेद की अटकलों को खारिज कर दिया। उन्होंने बताया कि कुछ सांसद विदेश में हैं, कुछ के परिवार में परेशानी है, जबकि कुछ अन्य बैठकों में व्यस्त हैं। सांसद शताब्दी रॉय ने कहा कि कौन आ रहा है और कौन नहीं, इस पर नजर रखना उनके लिए महत्वपूर्ण नहीं है। वहीं, शर्मिला सरकार ने भी स्पष्ट किया कि बैठक में नहीं आ पाने वाले सांसदों के साथ किसी तरह की गलतफहमी नहीं है। सांसद रचना बनर्जी ने इस आयोजन को दुर्गा पूजा से पहले एक सामान्य मिलन-जुलन कार्यक्रम बताया, जिसमें सभी का मिलना जरूरी था क्योंकि संसद के बाद वे अपने-अपने क्षेत्रों में व्यस्त हो जाते हैं।
