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जालसाजी में बंटी-बब्ली का भी उस्ताद निकला यह मास्टरमाइंड कपल

फिर वसूली रोकने के लिए बेटियों से खुद पर ही करवाए मुकदमे


भोपाल। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ऐसे ठग दंपत्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिन्होनें पहले तो बेटियों के नाम पहले ही दान की जा चुकी ज़मीन को बैंक में गिरवी रखकर 2 करोड़ का लोन लिया और बाद में बैंक की वसूली रोकने के लिए बेटियों से ही अपने खिलाफ मुकदमे दर्ज करवाए कि ज़मीन तो बेटियों की है। जॉच के बाद ईओडब्ल्यू ने जालसाज जोड़े बिल्डर जीशान अली और उसकी पत्नी नाजनीन अली के खिलाफ एफआइआर दर्ज की है।

दंपत्ति की शुरु से ही थी जालसाजी की प्लानिंग….
विभाग द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार ईओडब्ल्यू को की गई शिकायत में आरोप था, कि जीशान अली उनकी पत्नी नाजनीन अली और माँ स्व. निकहत शमीम ने शुरू से ही धोखाधड़ी की नियत से ग्राम बावड़ियाकलां, तहसील हुजूर में स्थित 526.83 वर्गमीटर व्यावसायिक ज़मीन बैंक में गिरवी रखी। आरोप यह भी था कि बेटियों के नाम पहले किया गया हिबानामा बैंक से छिपाया गया और 2 करोड़ का लोन लेकर वापस नहीं किया गया। जब बैंक ने वसूली का प्रयास किये तब वसूली रोकने के लिए परिवार के लोगों से अपने ही खिलाफ सिविल मुकदमे दायर करवाए गए। एंजेसी ने पंजाब नेशनल बैंक, उप-पंजीयक कार्यालय भोपाल, ऋण वसूली न्यायाधिकरण जबलपुर और ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरण इलाहाबाद के रिकॉर्ड लेकर इसकी जाँच की।

पहले जमीन खरीदी फिर तीन बेटियो के नाम किया हिबानामा…..
जाँच में सामने आया की गिरवी रखी ज़मीन शादाब गृह निर्माण सहकारी समिति की थी। समिति ने 9 अप्रैल 2007 को टेंडर निकाला, जिसमें केवल जीशान अली ने बोली लगाई और 5 फरवरी 2008 को इस ज़मीन की रजिस्ट्री से उनके नाम हो गई। बाद में 10 जुलाई 2013 को यही ज़मीन हिबानामे से उसने अपनी तीन बेटियों के नाम कर दी थी, जिनमें से दो उस समय नाबालिग थीं। यानी 2013 के बाद यह ज़मीन जीशान अली की नहीं बल्कि उनकी बेटियों की हो चुकी थी। यह बात खुद जीशान अली ने 20 फरवरी 2018 को बैंक के चीफ मैनेजर को लिखे अपने पत्र में मानी है।

2015 मे जमीन को अपना दिखाकर ले लिया लोन……
इसके बाद 2015 में बैंक के सामने इस ज़मीन को जीशान अली की अपनी संपत्ति दिखाते हुए बैंक की 22 सिंतबर 2015 की लीगल सर्च रिर्पोट में ज़मीन को साफ़ और बिकने योग्य बताया। साथ ही नाबालिग के हित वाले कॉलम में नॉन लिखा गया। हिबानामे का कहीं ज़िक्र नहीं था। इसी आधार पर 24 सिंतबर 2015को रॉयल हेरिटेज बिल्डर्स के नाम 2 करोड़ की ओवरड्रॉफ्ट सीमा स्वीकृत हुई।

परिवार वाले ही बने गांरटर, बताया जमीन पर कोई दावा नहीं…..
उसी दिन हुए ओवरड्राफ्ट एग्रीमेंट और एग्रीमेंट ऑ गॉरंटी में जीशान अली, नाजनीन अली और स्व. निकहत शमीम गारंटर बने और इसी ज़मीन को गिरवी के लिए दर्शाया गया। एग्रीमेंट में यह घोषणा भी की गई कि संपत्ति पर कोई मुकदमा, भार या दूसरा दावा नहीं है। 4 नंवबर से 6 नंवबर 2015 के बीच इस ज़मीन का बंधक विलेख रजिस्टर्ड कराया गया। फरवरी 2015 में जीशान अली और नाजनीन अली ने अपनी नाबालिग बेटी के नाम का एक दूसरा प्लॉट बेचने के लिए जिला न्यायालय से बाकायदा अनुमति ली थी। यानी उन्हें पता था कि नाबालिग की संपत्ति अदालत की अनुमति के बिना नहीं बेची जा सकती। फिर भी छह महीने बाद बेटियों के नाम हिबा की जा चुकी ज़मीन बिना किसी अनुमति और बिना बताए बैंक में गिरवी रख दी गई।

लोन एनपीए होने पर बेटयो से सिविल वाद दायर कराया…..
साल 2017 में लोन खाता एनपीए हो गया। बैंक का सरफेसी कानून के तहत 3 जनवरी 2018 का माँग-नोटिस आने से पहले ही 4 अक्टूबर 2017 को बेटियों की ओर से सिविल वाद दायर कर दिया गया कि ज़मीन उनकी है, और बैंक इसे नहीं ले सकता। यह वाद खारिज होने के बाद 10 सिंतबर 2018 को डॉर्ट इलाहाबाद में अपील दायर की गई। बैंक ने 21 नंवबर 2018 को अदालत में दिए अपने जवाब में इसे जीशान अली की मिलीभगत से चलाई जा रही प्रॉक्सी लिटिगेशन बताया।

बैंक के पक्ष में आया फैसला, वसूली प्रमाण पत्र जारी हुआ…..
डीआरटी जबलपुर ने 8 मार्च 2019 को बैंक के पक्ष में फैसला देकर वसूली प्रमाण-पत्र जारी किया। फिर भी पंजाब नेशनल बैंक के 2 करोड़ 7 लाख से अधिक की रकम आज तक वापस नहीं हुए। इस तरह जो हिबानामा लोन लेते समय छिपाया गया, वही लोन डूबने पर वसूली रोकने की ढाल बना दिया गया।

जालसाज मियां-बीवी पर इन धाराओ में कसा शिंकजा……
जॉच में सामने आये तथ्यों के आधार पर आरोपी जीशान अली मेसर्स रॉयल हेरिटेज बिल्डर्स कोलोनाईजर्स इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा.लि. उसकी पत्नि नाजनीन अली और अन्य के विरुद्ध बीएनएस की धारा 318(4) और 61(2) में एफआईआर दर्ज कर आगे की जॉच की जा रही है। लोन की गारंटर और कंपनी की निदेशक रहीं स्व. निकहत शमीम की मृत्यु हो चुकी है, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है।

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