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आरएसएस के पथ संचलन पर मद्रास हाईकोर्ट की पुलिस को फटकार

चेन्नई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पथ संचलन को अनुमति देने से जुड़े मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु पुलिस की दलीलों पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने सवाल किया कि क्या मुस्लिम समुदाय के किसी व्यक्ति ने प्रस्तावित रूट मार्च पर आपत्ति जताई है? न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन ने पुलिस की दलीलों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों को अनावश्यक रूप से जुलूसों का विरोधी बताना उचित नहीं है। उन्होंने पुलिस से यह भी पूछा कि आरएसएस के मार्च का विरोध करने के लिए प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से जुड़ी घटनाओं का उल्लेख क्यों किया जा रहा है।

यह मामला विजयादशमी के अवसर पर आरएसएस की ओर से तमिलनाडु में पथ संचलन निकालने की अनुमति मांगने से जुड़ा है। संघ ने राज्य में 128 स्थानों पर मार्च निकालने के लिए पुलिस से अनुमति मांगी थी, लेकिन पुलिस ने केवल 58 स्थानों पर इसकी मंजूरी दी। इसके बाद आरएसएस ने अनुमति नहीं दिए जाने के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट का रुख किया। निर्धारित कार्यक्रम में बदलाव करते हुए संघ ने उत्तरी जिलों के लिए 25 अक्टूबर और दक्षिणी जिलों के लिए एक नवंबर की तारीख तय की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस के उस रुख पर सवाल उठाया, जिसमें मार्च के संभावित मार्ग पर मस्जिदों की मौजूदगी और अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़ी आशंकाओं को अनुमति नहीं देने का आधार बनाया गया था। न्यायमूर्ति लक्ष्मीनारायणन ने कहा कि बिना ठोस आधार के मुस्लिम समुदाय को आरएसएस के जुलूसों का विरोधी बताना उचित नहीं है।

अदालत ने पूर्व में दिए गए न्यायिक फैसलों का भी उल्लेख किया। उसने याद दिलाया कि न्यायमूर्ति जी. जयचंद्रन के एक पुराने फैसले में मस्जिदों और चर्चों की मौजूदगी, यातायात बाधित होने की आशंका तथा आरएसएस की विचारधारा का विरोध करने वाले संगठनों की उपस्थिति को मार्च पर रोक लगाने के पर्याप्त आधार के रूप में स्वीकार नहीं किया गया था। हाईकोर्ट ने सितंबर 2022 में आरएसएस के पथ संचलन को अनुमति दी थी। इसके बाद 11 अप्रैल 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की चुनौती खारिज कर दी थी। मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।

दोनों पक्षों को दिशानिर्देशों का पालन करने की हिदायत…..

अदालत ने कहा कि 11 मार्च 2024 को न्यायमूर्ति जी. जयचंद्रन ने आरएसएस के रूट मार्च के आयोजन के लिए दिशानिर्देश तय किए थे, लेकिन दोनों पक्ष उनका पालन करने में विफल रहे हैं। कोर्ट ने आरएसएस को पथ संचलन के लिए वैकल्पिक मार्गों और आयोजन के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों का विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे विवादों के बार-बार न्यायालय पहुंचने से बहुमूल्य न्यायिक समय खर्च होता है। पुलिस और आयोजकों, दोनों से अपेक्षा की जाती है कि वे पहले से निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन करें और हर बार एक ही विवाद को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाने से बचें।

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