Spread the love

मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है, लेकिन इसतरह के प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था और आम लोगों को होने वाली असुविधा का ध्यान रखा जाना चाहिए। मुंबई की अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस की कार्रवाई पर व्यापक रोक लगाने का आदेश देने से पहले प्रदर्शनकारियों की पृष्ठभूमि और अन्य संबंधित पहलुओं पर विचार करना जरूरी है।
मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ महाराष्ट्र सरकार से उन याचिकाओं पर जवाब मांग रही थी, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) के खिलाफ मुंबई में हाल में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस पर लोगों को कथित रूप से अवैध हिरासत में लेने का आरोप लगा है। यह सुनवाई अधिवक्ता सावर देवरे की ओर से दायर जनहित याचिका पर हुई।
याचिका में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ पुलिस की कथित कार्रवाई और हिरासत में लेने का मुद्दा उठाकर मांग की गई थी कि इसतरह के प्रदर्शनों में शामिल किसी भी व्यक्ति को हिरासत में न लिया जाए। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गायत्री सिंह ने चार लोगों की ओर से आवेदन पेश किया। उन्होंने दावा किया कि पिछले सप्ताह मार्च में शामिल होने के बाद इन लोगों को एक दिन हिरासत में रखा गया और बाद में उनके घरों में नजरबंद कर दिया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता ने भी दो अन्य लोगों के हलफनामे अदालत में प्रस्तुत किए, जिन्हें कथित तौर पर घरों से हिरासत में लिया गया था। अदालत ने याचिकाकर्ताओं और राज्य सरकार को इन शिकायतों पर भी जवाब देने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *