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जेन जी युवाओं और उनके अभिभावकों को दीं नसीहतें


नागपुर। नागपुर में विजयादशमी के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने अपने संबोधन में जेन जी युवाओं और उनके अभिभावकों को अहम नसीहतें दीं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को सही और गलत में फर्क करने और चुनाव करने की कला सिखानी होगी। साथ ही अभिभावकों को बच्चों में राष्ट्र सर्वप्रथम और सर्वोपरि है का भाव जगाना होगा।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मोहन भागवत ने देश के समग्र विकास के लिए स्वाधीनता के समय देश को आजाद कराने वाले सेनानियों से भी ज्यादा काम करने की जरुरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं का देश है, लेकिन इन्हीं विविधताओं के बीच सभी को एकजुट होकर चलना है। आरएसएस प्रमुख ने नई पीढ़ी में बढ़ रही नशे की समस्या को एक गंभीर राष्ट्रीय चुनौती बताया और घोषणा की कि आरएसएस भारत में नशे के खिलाफ एक अभियान चलाएगा। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि आचरण त्यागने के कारण ही हमारा पतन हुआ था और हम गुलाम हुए थे, इसलिए युवाओं को सही आचरण अपनाना होगा। भागवत ने भारत की सनातन परंपरा की समावेशी प्रकृति पर भी बात की और सभी के अंदर राष्ट्र सबसे पहले का भाव होने को जरुरत बताया।
उन्होंने हाल ही में कैप्टन स्मिथ मच्छार द्वारा फ्लाईदुबई फ्लाइट में लोगों की जान बचाने के कार्य का उल्लेख करते हुए इसे देश की प्रतिष्ठा बढ़ाने वाला और हिंदू स्वभाव बताया। भागवत के मुताबिक हिंदू भाव में विश्व को जोड़ने की शक्ति है, जो राष्ट्रीय और वैश्विक शांति के लिए भी एक अहम कदम है। उन्होंने युवाओं से इस राष्ट्रबोध और कर्तव्यनिष्ठा को समझने का आग्रह किया। अपने संबोधन में भागवत ने संघ के इतिहास पर भी प्रकाश डाला, बताया कि इसकी स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने 27 सितंबर 1925 को की थी और वर्तमान में देशभर में करीब 40 हजार से ज्यादा शाखाएं चलती हैं, जबकि संघ की शाखाएं 39 देशों में मौजूद हैं।

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