
न्यूयॉर्क। यूरोप के छह देशों में महंगाई, बेरोजगारी, महंगी शिक्षा और आवास संकट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। फ्रांस, इटली, स्पेन, ग्रीस, बेल्जियम और अल्बानिया में लोगों ने सड़कों पर उतरकर सरकारों की नीतियों के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है। कई जगह प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। फ्रांस में राजधानी सहित कई शहरों में आगजनी और लूटपाट की घटनाएं सामने आईं, जबकि ग्रीस में छात्र हॉस्टल की कमी और महंगे किराए के विरोध में संसद के बाहर धरने पर बैठ गए। फ्रांस में 17 अक्टूबर को करीब 140 शहरों में प्रदर्शन हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब आठ लाख लोग सड़कों पर उतरे। पेरिस, मार्सेई और बोर्डो में तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं हुईं। लीमोज में ऐतिहासिक सिटी हॉल में आग लगने की खबर सामने आई। 18 अक्टूबर तक करीब 1,800 लोगों को गिरफ्तार करने और 500 से अधिक सुरक्षाकर्मियों तथा दमकलकर्मियों के घायल होने की जानकारी दी गई। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने हिंसा की निंदा की।
अल्बानिया की राजधानी तिराना में प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग

वहीं एक और यूरोपिय देश अल्बानिया की राजधानी तिराना में प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग की। महंगी शिक्षा, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन 17 अक्टूबर को हिंसक हुआ। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर और पेट्रोल बम फेंक दिए। इस दौरान कुछ सरकारी कार्यालयों और इमारतों को नुकसान पहुंचा। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया।
इटली और स्पेन में महंगाई व आवास संकट बड़ा मुद्दा : इटली में छात्रों और कर्मचारियों ने महंगाई, कम वेतन और शैक्षणिक सुविधाओं की कमी के खिलाफ प्रदर्शन किया। मिलान में आंदोलन के दौरान तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुईं। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने हिंसा की कड़ी निंदा की। पीएम मेलोनी ने प्रदर्शनकारियों से संयम बरताने की अपील की है। वहीं, स्पेन के 50 से अधिक शहरों में लोगों ने बढ़ते किराए और बेदखली के खिलाफ आवाज बुंलद की है। प्रदर्शनकारियों ने किराया कम करने और किरायेदारों के अधिकारों को मजबूत करने की मांग की। ग्रीस की राजधानी एथेंस में छात्र सस्ते हॉस्टल, आर्थिक सहायता और बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं की मांग को लेकर संसद के बाहर तंबू लगाकर बैठे हैं। छात्रों का कहना है कि महंगे किराए और सीमित आवास सुविधाओं के कारण पढ़ाई जारी रखना मुश्किल होता जा रहा है।
बेल्जियम में सरकारी नीतियों का विरोध :

वहीं बेल्जियम में ट्रेड यूनियनों और छात्रों ने सरकारी खर्च में कटौती, शिक्षा सुधार और वेतन संबंधी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी। इन प्रदर्शनों में महंगाई, बेरोजगारी, महंगी शिक्षा और आवास संकट प्रमुख मुद्दे बनकर उभरे हैं। युवाओं और कर्मचारियों की नाराजगी ने यूरोप की सरकारों के सामने आर्थिक नीतियों और आम लोगों की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती खड़ी कर दी है।
