
भोपाल । प्रदेश कार्यकारिणी घोषित होते ही प्रदेश में जो बवाल मचा, उसने एक बार फिर जीतू पटवारी के नेतृत्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस फॉर्मूले पर जीतू ने अपनी टीम तैयार की है, उसे बड़े नेताओं ने निशाना तो बनाया ही, वहीं छोटे नेताओं ने भी टीम को लेकर कई सवालिया निशान जीतू पटवारी पर खड़े कर दिए। इसके पहले विधानसभा और लोकसभा चुनाव के बीच बड़ी संख्या में कांग्रेस से जाने वाले नेताओं का ठीकरा भी पटवारी के नाम रहा तो इस बार कार्यकारिणी घोषित होते ही इस्तीफा देने वालों का रिकॉर्ड भी बन गया है, जो जीतू पटवारी के राजनीतिक कॅरियर के लिए ठीक नहीं है। अब पटवारी जिलाध्यक्षों की सूची को लेकर आराम से निर्णय करने के मूड में नजर आ रहे हैं।
कांग्रेसी कार्यकारिणी घोषित करते समय जीतू पटवारी ने यह नहीं सोचा था कि वे फिर से अपनी ही पार्टी में उलझ जाएंगे। कांग्रेस में इस्तीफे का दौर शुरू हो गया और बताया जा रहा है कि पूरे प्रदेशभर से करीब दो दर्जन नेताओं की नाराजगी सामने आई है। इनमें से आधे नेताओं ने तो अपना इस्तीफा सार्वजनिक भी कर दिया और पटवारी की टीम को लेकर विरोध जताया। इंदौर में प्रमोद टंडन और अमन बजाज जैसे नाम हैं, जो नई कार्यकारिणी से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। प्रमोद टंडन तो खुले तौर पर कांग्रेस से इस्तीफा दे चुके हैं, वहीं अमन बजाज ने अपना पद वापस लौटा दिया है। बजाज शहर अध्यक्ष की दौड़ में हैं और युवा नेतृत्व होने के कारण उन्हें इंदौर के कांग्रेसी युवा भी पसंद कर रहे हैं। दूसरी ओर पटवारी की कार्यकारिणी घोषित होने के बाद जिलाध्यक्षों के नाम तय होना थे। इनमें इंदौर भी शामिल है, लेकिन अब पटवारी फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं। उन्हें डर है कि कहीं ऐसा न हो कि दूसरी बार फिर उन्हें विरोध का सामना करना पड़े। इसी को लेकर अब जिलाध्यक्षों की सूची अटक गई है। सूत्रों का कहना है कि इस सूची को लेकर अब एक बार फिर मंथन किया जाएगा और निष्क्रिय अध्यक्षों को तो पहली बार में ही हटा दिया जाएगा। वहीं बाद में दूसरे अध्यक्षों के बारे में निर्णय लिया जाएगा। 13 नवंबर को विजयपुर और बुधनी उपचुनाव की वोटिंग है। उसके बाद संभवत: कांग्रेस की एक बैठक होगी और उसमें यह निर्णय होगा। विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि नवंबर के आखिरी सप्ताह में यह बैठक हो सकती है। इंदौर के मामले में जिलाध्यक्ष सदाशिव यादव का हटना तो तय है, लेकिन सुरजीतसिंह चड्ढा को लेकर सस्पेंस बरकरार है। दोनों को लेकर प्रदेश प्रभारी भंवर जितेंद्रसिंह तो कह चुके हैं कि दोनों को ही हटाया जाएगा, लेकिन अभी प्रदेश कांग्रेस कमेटी किसी निर्णय पर नहीं पहुंच पा रही है। संभवत: यह सस्पेंस महीने के आखिरी में समाप्त हो सकता है।
