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हाईकोर्ट ने नगर निगम को दी 30 दिन की मोहलत

जबलपुर । हाईकोर्ट ने नगर निगम जबलपुर को निर्देश दिए िक दिव्यांग याचिकाकर्ता को राजीव गांधी आवास योजना के तहत मकान का कब्जा सौंपें। जस्टिस एसए धर्माधिकारी की एकलपीठ ने इसके लिए 30 दिन की मोहलत दी है।
जबलपुर निवासी नंदू माली की ओर से अधिवक्ता रणवीर सिंह परिहार ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता दिव्यांग है और उसका चयन राजीव आवास योजना के तहत बने मकान के लिए हुआ था। याचिकाकर्ता को 3 लाख 81 हजार देना था। शर्त यह थी कि याचिकाकर्ता एक लाख रुपए एडवांस देगा और शेष रकम प्रतिमाह 3 हजार रुपए की किश्तों में चुकाएगा। एडवांस जमा करने पर उसे मकान आवंटित कर दिया जाएगा। याचिकाकर्ता ने एक लाख रुपए की राशि जमा कर दी, इसके बावजूद उसे मकान का आवंटन नहीं किया गया, इसलिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।

अवैध होर्डिंगस यूनिपोल पर स्टेटस रिपोर्ट तलब…………

शहर के अलग-अलग स्थानों पर लगे अवैध होर्डिंग्स और यूनिपोल के मामले में हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन व नगर निगम प्रशासन से स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। एक जनहित याचिका दायर कर अवैध होर्डिंग्स और यूनिपोल लगाने को चुनौती दी गई है। गुरूवार को प्रारंभिक सुनवाई के बाद एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव, कलेक्टर जबलपुर व नगर िनगम आयुक्त को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले पर अगली सुनवाई 4 अक्टूबर को होगी। नागरिक उपभोक्ता मार्गर्शक मंच के डॉ पीजी नाजपांडे व रजत भार्गव की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया िक पहले यूनिपोल व होर्डिंग लगाने के नियम नहीं थे। वर्ष 2014 में हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। उसके बाद वर्ष 2017 में मध्यप्रदेश आउटडोर विज्ञापन मीडिया नियम बनाए गए। इन नियमों के अनुसार जहाँ फुटपाथ मौजूद नहीं है, वहाँ पर मौजूदा सड़क के किनारे 3 मीटर के दायरे में यूनिपोल या होर्डिंग्स लगाने अनुमति नहीं दी जाएगी। जहाँ पर फुटपाथ हैं, वहाँ पर फुटपाथ के किनारे से 3 मीटर के दायरे में यूनिपोल नहीं लगाए जा सकेंगे। सड़क के मध्य और फुटपाथों पर यूनिपोल और होर्डिंग्स नहीं लगाए जा सकेंगे। उन मोड़ वाले मार्गों पर जहाँ से दूर से आने वाले वाहन दिखाई नहीं देते वहाँ पर भी यूनिपोल लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकेगी। याचिका में कहा गया कि शहर में अधिकांश जगह यूनिपोल लगाने में इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। इसलिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।

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