थाने में मारपीट या मौत की घटना तो एसपी होंगे जिम्मेदार

दमोह। पुलिस हिरासत में आरोपी को प्रताडि़त करने और मौत की बढ़ती घटनाओं पर रोक के लिए पुलिस मुख्यालय ने सभी रेंज आईजी और पुलिस अधीक्षकों को हवालातों की सुरक्षा पर फोकस करने के निर्देश जारी किए हैं। पीएचक्यू द्वारा जारी सर्कुलर में कहा गया है कि रेंज आईजी अपने अधीनस्थ जिलों के थानों का औचक निरीक्षण करें वहीं पुलिस अधीक्षकों को ताकीद किया गया है कि थानों के हवालात में होने वाली मारपीट और मौत जैसी घटनाओं के मामले में सुपरविजन में लापरवाही के लिए उन्हें जिम्मेदार माना जाएगा।
एडीजी अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) पवन कुमार श्रीवास्तव ने ये निर्देश जारी किए हैं। सभी रेंज आईजी, पुलिस आयुक्त नगरीय पुलिस भोपाल इंदौर और सभी पुलिस अधीक्षकों को दिए निर्देश में कहा गया है कि पुलिस अभिरक्षा में होने वाली मारपीट की घटनाओं को रोकने के निर्देशों पर सख्ती से अमल किया जाए। गौरतलब है कि तीन दिन पहले मुरैना में एक युवक ने थाने के हवालात में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
थाने और हवालात में हो पर्याप्त फोर्स
पीएचक्यू ने रेंज आईजी और पुलिस अधीक्षकों से कहा है कि थाने में हवालात के लिए पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध होना चाहिए। यदि किसी थाने की हवालात के लिए पुलिस फोर्स पर्याप्त नहीं है तो वहां विचाराधीन कैदी को न रखा जाए और अन्य किसी बंदीगृह या जहां पर्याप्त फोर्स मौजूद है, वहीं रखा जाए। फोर्स की कमी के नाम पर हिरासत में लिए गए लोगों की सुरक्षा में कमी नहीं होनी चाहिए। हर समय एक आरक्षक या प्रधान आरक्षक हिरासत में लिए गए व्यक्ति की सुरक्षा के लिए तैनात किया जाए। हवालात की सुरक्षा के लिए तैनात कर्मचारी रात में हवालात का विशेष ध्यान रखें और नियमित तौर पर बंद किए गए व्यक्ति की निगरानी करते रहें ताकि कोई अप्रिय गतिविधि वह अंजाम न दे सके।
आरोपी भागने न पाए
हिरासत में लिए गए व्यक्ति को वाहन से थाने तक लाने के दौरान या उस व्यक्ति से किसी वस्तु की बरामदगी, उसकी मेडिकल जांच, न्यायालय में उसे पेश करने के लिए ले जाते समय यह ध्यान रखा जाए कि वह किसी भी स्थिति में असुरक्षित न रहे। किसी भी स्थिति में वह भागने की हालत में न हो। मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग द्वारा पुलिस हिरासत में मौत व पुलिस अधिकारियों के उत्तरदायित्व के नाम से हर पुलिस अधिकारी कर्मचारी के लिए निर्देश पुस्तिका का प्रकाशन कराया गया है। यह थानों में मौजूद है। इसके आधार पर काम किया जाए।
तत्काल कराएं मेडिकल परीक्षण
सर्कुलर में कहा गया है कि आरोपी को हिरासत में लेते समय और हवालात में डालते समय यह देखना जरूरी है कि उसके पास कोई ऐसी वस्तु न रहे जिससे वह खुद को किसी प्रकार से नुकसान पहुंचा सके। बीमार, ज्यादा नशे में पाए गए और अन्य घायल व्यक्तियों को थाने में न रखा जाए और जल्द से जल्द उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया जाए। हिरासत में लिए गए हर व्यक्ति का मेडिकल परीक्षण तत्काल कराया जाए। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के मुताबिक पुलिस अधीक्षक को अपने क्षेत्राधिकार के थानों के लिए सहायक उप निरीक्षक और इससे ऊपर स्तर के अधिकारी को नियुक्त करने का अधिकार दिया गया है। थानों के भीतर बने हवालात में लगे सीसीटीवी कैमरे की नियमित मानिटरिंग के लिए हर थाने में एएसआई स्तर के पुलिस अधिकारी को नियुक्त किया जाए और यह तय किया जाए कि कैमरे हर वक्त चालू रहें।
सीसीटीवी कैमरे पूरे थाने को कवर करें
पीएचक्यू ने कहा है कि सीसीटीवी कैमरे ऐसे लगाए जाएं कि उसके साथ किसी तरह की छेड़छाड़ न की जा सके। यह देखें कि कैमरे का एंगल ऐसे हो कि पूरे हवालात को कवर कर सके। हवालात के सीसीटीवी का फीड प्रधान आरक्षक लेखक को सीधे दिखना चाहिए। हिरासत में लिए गए व्यक्ति को न्यायालय में पेश करने के पहले अन्य किसी व्यक्ति से न मिलने दिया जाए जिससे किसी प्रकार के नशीले, जहरीले खाद्य पदार्थ या घातक वस्तुओं का लेन देन किया जा सके। पुलिस अधीक्षकों को इस ओर विशेष ध्यान देना है कि यदि उनके अधीन किसी थाने में हिरासत में मारपीट होती है तो यह माना जाएगा कि कहीं न कहीं एसपी के सुपरविजन में लापरवाही रही है।
हिरासत में मारपीट नहीं होना चाहिए
पुलिस हिरासत में लिए गए व्यक्ति को थाना स्टाफ के द्वारा किसी भी प्रकार से प्रताडि़त न किया जाए। इसे रोकने के लिए एसपी, एएसपी, सीएसपी और एसडीओपी द्वारा सुपरविजन और आकस्मिक दौरे किए जाएं। जोन आईजी और पुलिस अधीक्षक इसको लेक विशेष बैठकें करें और थाना प्रभारियों को संवेदनशील बनाएं ताकि उनके अधीन काम करने वाला आरक्षक संबंधित व्यक्ति की सुरक्षा को लेकर संवेदनशील रहे। जोन आईजी भी यह देखेंगे कि उनके अधीन जिलों के थानों के हवालात सुरक्षित हैं ताकि वहां कोई बंदी अपने शरीर को नुकसान न पहुंचा सके। किसी भी कैदी को बिना सुरक्षा के थाने के हवालात में न रखा जाए। हर समय एक प्रहरी हवालात के बाहर मौजूद होना चाहिए।
