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मामला छात्राओं से मोबाइल तलाशी के दौरान अभद्रता का
इन्दौर । मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर ने परीक्षा के दौरान मोबाइल तलाशी के नाम पर छात्राओं के साथ अभद्रता के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते पुलिस कमिश्नर इन्दौर को राहत देते हुए उन्हें अवमानना कार्रवाई से मुक्त कर दिया। आदेश के बावजूद समयावधि में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करने पर कोर्ट ने पहले अवमानना माना था। मामले में विभाग द्वारा शपथ पत्र पर कहा गया कि रिपोर्ट सितंबर माह में ही पेश कर दी थी जो कि समयावधि में थी। बता दें कि शारदा कन्या स्कूल में अध्यापिका द्वारा परीक्षा के दौरान कुछ छात्राओं के पास मोबाइल होने की शंका पर उन्हें बाथरूम में ले जाकर उनकी तलाशी ली गई थी। जहां जबरदस्ती छात्राओं के कपड़े उतरवाए गए थे। इसे लेकर अभिभावकों ने लिखित शिकायत मल्हारगंज थाने में की थी। कोर्ट ने 30 अगस्त 2024 को आदेश दिया था कि पुलिस कमिश्नर एक माह में जांच रिपोर्ट हाई कोर्ट की रजिस्ट्री के समक्ष प्रस्तुत करें। पिछली सुनवाई पर कोर्ट के संज्ञान में आया था कि रिपोर्ट अब तक पेश नहीं हुई। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए पुलिस कमिश्नर को आदेश दिया था कि वे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों। सोमवार को हुई सुनवाई में पुलिस कमिश्नर की ओर से शपथ पत्र प्रस्तुत हुआ। इसमें कहा कि 28 सितंबर को ही रिपोर्ट रजिस्ट्री के समक्ष प्रस्तुत की जा चुकी थी। कोर्ट में इसकी रसीद भी पेश की गई। इस पर कोर्ट ने शासन को जवाब के लिए समय देते हुए कमिश्नर के खिलाफ प्रस्तावित अवमानना कार्रवाई निरस्त कर दी। मामले में जनहित याचिका चिन्मय मिश्र ने एडवोकेट अभिनव धनोतकर के माध्यम से दायर की हुई है।

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