

दमोह ! मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद, संस्कृति विभाग के तत्वावधान में ज़िला अदब गोशा, दमोह द्वारा सिलसिला एवं तलाशे जौहर के अंतर्गत प्रसिद्ध शायर शायर प्रो. अब्दुल ख़लील दमोही को समर्पित स्मृति प्रसंग एवं रचना पाठ का आयोजन सुल्तान मैरिज गार्डन, दमोह में ज़िला समन्वयक अदीब दमोही के सहयोग से हुआ।अकादमी की निदेशक डॉ नुसरत मेहदी ने कार्यक्रम के बारे में बताया कि मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्मृति प्रसंग एवं रचना पाठ आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य उर्दू भाषा और साहित्य का प्रचार-प्रसार एवं दिवंगत साहित्यकारों की प्रेरणादायक यात्रा को याद करना एवं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करना है। इसी कड़ी में दमोह में आयोजित गोष्ठी “सिलसिला” ख़लील दमोही को समर्पित है।
गोष्ठी में वरिष्ठ शायरों का रचनापाठ और युवा शायरों के लिए “तलाशे जौहर” प्रतियोगिता भी आयोजित है। यह प्रतियोगिता न केवल युवा शायरों के लिए अपनी कला को प्रदर्शित करने का अवसर है, बल्कि उनके अंदर की साहित्यिक प्रतिभा को निखारने का भी एक माध्यम है। वरिष्ठ शायरों का रचनापाठ उनके अनुभव और साहित्यिक योगदान को साझा करने के लिए होता है, जो युवा शायरों के लिए भी एक प्रेरणा का स्रोत बनता है।
दमोह ज़िले के समन्वयक अदीब दमोही ने बताया कि स्मृति प्रसंग एवं रचना पाठ दो सत्रों पर आधारित था। प्रथम सत्र में सुबह 11:30 बजे तलाशे जौहर प्रतियोगिता आयोजित की गई जिसमें ज़िले के नये रचनाकारों ने तात्कालिक लेखन प्रतियोगिता में भाग लिया। निर्णायक मंडल के रूप में छतरपुर के वरिष्ठ शायर हारुन अना क़ासमी एवं भोपाल के शायर चित्रांश खरे उपस्थित रहे जिन्होंने प्रतिभागियों शेर कहने के लिए दो तरही मिसरे दिए गये, उन मिसरों पर नए रचनाकारों द्वारा कही गई ग़ज़लों पर एवं उनकी प्रस्तुति के आधार पर निर्णायक मंडल के संयुक्त निर्णय से मोहम्मद अयाज़ ने प्रथम, तनवीर अहमद ने द्वित्तीय एवं शेख़ अज़हर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले तीनों विजेता रचनाकारों को उर्दू अकादमी द्वारा पुरस्कार राशि क्रमशः 3000/-, 2000/- और 1000/- एवं प्रमाण पत्र दिए जाएंगे।
दूसरे सत्र में दोपहर 2:00 बजे सिलसिला के तहत स्मृति प्रसंग एवं रचना पाठ का आयोजन हुआ जिसकी अध्यक्षता दमोह के प्रसिद्ध समाजसेवी नरेंद्र दुबे ने की एवं विशिष्ट अतिथियों के रूप में हारुन अना कासमी, चित्रांश खरे, अनवार उस्ताद, अब्दुल वहीद क़ुरैशी,उबैद ग़ौरी आदि मंच पर उपस्थित रहे। इस सत्र के प्रारंभ में ख़लील दमोही के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर ताहिर दमोही ने प्रकाश डाल कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
उन्होंने बताया कि ख़लील दमोही उस्ताद शायरों में शुमार होते थे। बुनियादी तौर पर ग़ज़ल के शायर रहे हैं। ग़ज़ल के अलावा नात, सलाम, मनक़बत भी आपने बेशुमार कही हैं l लेकिन इनके अस्ल शायराना जौहर ग़ज़लिया शायरी के वसीले से ही तलाश किये जा सकते हैं l
आप सन 1940 में पैदा हुए और 1964 से लेकर ताहयात लगभग 55 सालों तक उर्दू साहित्य की सेवा करते रहे। आप दस साल तक अन्जुमन उर्दु अदब के अध्यक्ष और उसके बाद बज़्मे हैरत के सरपरस्त रहे ह आपके मार्गदर्शन में दमोह में मुसलसल बड़े बड़े ऑल इंडिया मुशायरा आयोजित हुए। आपकी दो किताबें शाया हुईं, एक ग़ज़ल की “कशिश “और नात की “ज़ीनते कायनात “के नाम से।
सिलसिला में जिन शायरों ने कलाम पेश किया उनके नाम और अशआर निम्न हैं।
तुमने साहिल से ही आवाज़ लगा दी होती।
डूबने वाले को तिनके का सहारा होता।।
फ़रहत दमोही
फ़ितरत ही गर ग़ुलाम है सय्याद क्या करे।
दिल आशना ए जाम है सय्याद क्या करे।।
किशोर तिवारी ‘केशू’ गुरू
उस शोख़ के आगे थे सब रंग धनक फीके।
वो शाखे बदन लचकी तो मेरा क़लम टूटा।।
हारून अना क़ासमी
कोई भी ऐसा सफ़र होता नहीं।
जिसकी आंखो में है घर होता नहीं।।
सत्यमोहन वर्मा
दर्द दिल में जब हुए हज़ार।
शायरों में तब हुए शुमार।।
नन्हे सिंह ठाकुर ‘आदम’
दम तो ले तश्नालबी लाएगा पानी कोई।
होगी सहरा में भी उलफ़त की निशानी कोई।।
ताहिर दमोही
वहशियत के ख़ारज़ारो को मिटाना चाहिए।
आदमीयत के महकते गुल खिलाना चाहिए।।
डॉ. रफ़ीक़ आलम
दिल की धड़कन और फिर आंखों का पानी हो गये।
तुम जुदा भी तब हुए जब ज़िंदगानी हो गए।।
चित्रांश खरे
दिल तो हम दे दें मगर दिलदार होना चाहिए।
वाकई जो यार हो तो यार होना चाहिए।।
डॉ. ताबिश अहसन
ज़ख़मी किया है जिसने मिरी ज़िंदगी को ताज।
उसकी नज़र का कैसे कहूं तीर कुछ नहीं।।
ताज दमोही
ग़म के मारे हुए हालात से हारे हुए लोग।
तुमको मिल जायें अगर उनका सहारा होना।।
सितारा नाज़
मिटा दो नफ़रत करो मोहब्बत न तुम रहोगे न हम रहेंगे।
जलायें आओ चराग़े उलफ़त न तुम रहोगे न हम रहेंगे।।
आसिफ़ अंजुम
सहर क़रीब है उसको अभी ख़बर ही नहीं।
स्याह रात समझती है मर गया सूरज।।
राजा साहिल ख़ान
रौशन है जिससे राह तिरी वो दिया हू्ॅं मैं।
तू जानता नहीं है तिरा रहनुमा हू्ॅं मैं।।
अनीस आतिफ़
बात कीजे न कोई नफ़रत की।
गुफ़्तगू कीजे सिर्फ़ उलफ़त की।।
इरफ़ान नूरी
जीत जाओ तो दिल बड़ा रखना।
हार जाओ तो हौसला रखना।।
अब्दुल अनआम
मैं सबके ऐ’ब को तबदील कर दूँ ख़ूबी में।
बना दे मेरे ख़ुदा ऐसा आईना मुझको।।
अदीब दमोही
सिलसिला एवं तलाशे जौहर का संचालन ताहिर दमोही द्वारा किया गया कार्यक्रम के अंत में ज़िला समन्वयक अदीब दमोही ने सभी श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।
