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कांग्रेस पार्षद ने सदन में उठाया पीएम आवास योजना में लापरवाही का मुद्दा
जबलपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े मामलों में गंभीर अनियमित्ताओं और लापरवाही का मुद्दा गत दिवस हुई नगर निगम सदन की बैठक में उठा. यहां कस्तूरबा गांधी वार्ड के पार्षद संतोष दुबे पंडा ने साक्ष्यों, दस्तावेजों और डेटा के साथ इस योजना क्रियान्वयन में हो रही गड़बड़ी पर सदन का ध्यान आकर्षित कराया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जो मकान गरीबों को दिए जाने हैं, वह बनकर तैयार हो रहे हैं, लेकिन इन मकानों तक पहुंचने के लिए कोई सड़क, नाली और पानी की व्यवस्था नहीं है। मोहनिया, कुदवारी, तिलहरी, तेवर परसवाड़ा जैसे क्षेत्रों में ये मकान बनाए जा रहे हैं। इन मकानों को पूरा करने के लिए नगर निगम को लोन लेने में भी बहुत मुश्किल हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया, एक तरफ महापौर का कहना है कि नगर निगम में पैसे की कोई कमी नहीं है, लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है। यदि पैसे की कमी नहीं होती तो ये कार्य समय पर पूरे हो जाते। समय पर कार्य पूरा नहीं होने के कारण प्रोजेक्ट की लागत लगातार बढ़ रही है। इसके परिणामस्वरूप 350 करोड़ की राशि से बने आवास अब खंडहर में तब्दील हो रहे हैं, लेकिन अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
संतोष दुबे पंडा ने बताया कि शहर से जुड़े गांवों में सरकारी जमीनों पर लगभग 5184 मकान बनाए जा रहे हैं। नगर निगम को केंद्र और राज्य सरकार से 350 करोड़ रुपए मिले थे, जिनसे छह स्थानों पर प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई थी। लेकिन कोई भी प्रोजेक्ट अब तक अंतिम रूप नहीं ले पाया है। जहां ईडब्ल्यूएस के मकान बन चुके हैं, वहां एलआईजी और एमआईजी के प्रोजेक्ट अटक गए हैं, क्योंकि नगर निगम के पास इतनी राशि नहीं है कि पीएम आवास योजना को आगे बढ़ाया जा सके। ये प्रोजेक्ट 5 साल पहले शुरू हुए थे, और इनमें से 20% राशि जो केंद्र सरकार ने हाउसिंग फॉर ऑल के तहत दी थी, वह भी खर्च हो चुकी है। उन्होंने आगे कहा, इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए नगर निगम को 80% राशि जुटानी थी, लेकिन अब तक आवासों तक पहुंच मार्ग नहीं बनाया गया है। इस कारण पीएम आवास योजना के सभी प्रोजेक्ट फेल हो गए हैं।

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