
कोर्ट ने शासन से चार सप्ताह में मांगा जवाब
इन्दौर । मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय इन्दौर खंडपीठ में दायर एक याचिका पर सुनवाई करते कोर्ट ने ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव एवं अध्यक्ष, आंतरिक शिकायत निवारण समिति सदस्य, अतिरिक्त संचालक स्थापना एवं सदस्य, संयुक्त आयुक्त, विधि प्रकोष्ठ आंतरिक शिकायत निवारण समिति, वित्त सचिव, म.प्र. शासन, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिलापंचायत एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिका 30 से 35 साल की सेवा के बाद सेवानिवृत हुए प्रदेश के लगभग 60 सहायक विकास विस्तार अधिकारियों ने दायर की है जिस पर उनकी और से पैरवी एडवोकेट अनुराग जैन ने की। एडवोकेट जैन के अनुसार वर्ष 1983 में सीधी भर्ती से स्नातक स्तर पर म.प्र. के ग्रामीण विकास विभाग ने 2000 सहायक विकास विस्तार अधिकारियों की भर्ती की गई थी। इन्हें अपनी 30 से 35 वर्षों की सेवा में विभाग ने कभी प्रमोशन नहीं दिया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में मप्र शासन ने 1 अप्रैल 2006 से समयमान वेतमान योजना शुरू की है। तब ग्रामीण विकास विभाग के प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों ने योजना का लाभ, तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों को मिलता देख विभाग में समयमान वेतनमान योजना लागू करने की प्रारंभिक कार्रवाई ही नहीं होने दी। यही नहीं खुद को लाभान्वित करने के लिए विभाग में समयमान वेतनमान योजना के स्थान पर षडयंत्रपूर्वक नवीन विभागीय ढांचा पुनर्गठन स्वीकृत करा लिया और गजट नोटिफिकेशन जारी होने के पहले ही प्रमोशन आदेश जारी करा लिए। इस तरह विभाग के तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों को उनके हक से वंचित कर दिया गया। विभाग के अधिकारियों ने खुद को लाभान्वित करने के लिए नवीन विभागीय ढांचा पुनर्गठन कर नए पदों का सृजन किया और वर्तमान पदों को तीन से छह गुना तक बढ़ाना शामिल किया गया।
प्रदेश के सहायक विकास विस्तार अधिकारियों ने वित्त विभाग के परिपत्र के पालन में विभागीय आंतरिक शिकायत निवारण समिति को अभ्यावेदन प्रस्तुत किए, जिन्हें आंतरिक शिकायत निवारण समिति ने अमान्य कर दिए। जबकि शासन ने आंतरिक शिकायत निवारण समिति को संघ के अभ्यावेदन पर विचार करने का अधिकार नहीं दिया है। इस पूरे मामले का खुलासा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से सूचना के अधिकार में ली गई जानकारी में हुआ। इसमें विभाग के प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों ने संगठित होकर विभाग के तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों के समयमान वेतनमान का सुनियोजित षडयंत्र कर स्वयं को लाभान्वित कर लिया। इस पर जनपद पंचायत- राजगढ़, जिला राजगढ़ से सेवानिवृत्त सहायक विकास विस्तार अधिकारी, लक्ष्मण प्रसाद वर्मा ने भी विभागीय आंतरिक शिकायत निवारण समिति को अभ्यावेदन प्रस्तुत किया था जिस पर समिति ने लगभग तीन वर्ष बाद बैठक में बगैर उसके एक भी बिंदु पर विचार किए अमान्य कर दिया। आंतरिक शिकायत निवारण समिति ने इस तरह के 59 अन्य अभ्यावेदन अमान्य किए हैं। वर्मा ने आंतरिक शिकायत निवारण समिति के मनमाने निर्णय को हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में चुनौती दी और मांग की कि विभाग में समयमान वेतनमान योजना लागू की जाए, दोषी अधिकारियों को दंड दिया जाए तथा मय ब्याज के ऐरियर्स के साथ-साथ अर्थाभाव के कारण बच्चों के उपयुक्त शैक्षिक प्रबंधन न होने से उनका भविष्य नष्ट हुआ है, की भरपाई के लिए एक करोड़ रुपए की अनुग्रह राशि दिलवाई जाए।
