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इंदौर खंडपीठ के आदेश की वैधानिकता पर लार्जर बेंच करेगी सुनवाई
जबलपुर। हाई काेर्ट की इंदौर खंडपीठ ने मध्य प्रदेश शासन द्वारा 53 प्रजातियों के वृक्षों की कटाई व परिवहन को अनुमति-मुक्त किए जाने के विरुद्ध दायर की गई याचिका को निरस्त कर दिया है। राज्य शासन व हस्तक्षेपकर्ताओं द्वारा यह जानकारी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ के समक्ष प्रस्तुत की गई। याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश का हवाला देते हुए कहा गया कि इंदौर खंडपीठ में सुनवाई के दौरान उसे प्रकाश में नहीं लाया गया था। हस जानकारी को अभिलेख पर लेकर हाई कोर्ट ने इंदौर खंडपीठ द्वारा पारित आदेश की समीक्षा के लिए याचिका को लार्जर बेंच में रेफर करने की व्यवस्था दे दी गई। जबलपुर के उपनगरीय क्षेत्र गढ़ा निवासी विवेक कुमार शर्मा सहित अन्य की ओर से दायर अलग-अलग याचिकाओं में कहा गया था कि मप्र शासन द्वारा सितम्बर 2015 में जारी अधिसूचना के माध्यम से वृक्षों की 53 प्रजातियों को हटाने के अलावा मध्य प्रदेश परिवहन (वनोपज) नियम, 2000 के नियम 4(2) का प्रविधान भी हटा दिया गया है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा टीएन गोदावर्मन थिरुमुल्कपाद बनाम भारत संघ के मामले में जारी आदेश के विपरीत है। इसके परिणामस्वरूप निजी भूमि पर स्थित वृक्षों को काटने या परिवहन करने के लिए कोई अनुमति प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं है। जनोपयोग के लिए अधिक वृक्षों को काटने से पर्यावरण पर दुष्प्रभाव पड़ेगा। पर्यावरण संतुलन बिगड़ने से मानव स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने अधिसूचना के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी। यह रोक बरकरार रखी गई है। इस मामले में अधिवक्ता अंशुमान सिंह पैरवी कर रहे हैं।

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