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सरकारी अधिकारियों और निजी कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज
बेंगलुरु। कर्नाटक में कोरोना महामारी के दौरान हुए 167 करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। इसमें सरकारी अधिकारियों और निजी कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि चिकित्सा आपूर्ति में घोटाले से राज्य को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है।
मीडिया रिपोर्ट में शिकायत के मुताबिक पीपीई किट और एन95 मास्क की खरीद में व्यापक अनियमितताएं पाई गईं। चिकित्सा शिक्षा निदेशालय (डीएमई) के मुख्य लेखा अधिकारी डॉ. एम. विष्णुप्रसाद ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई है। इसमें डीएमई के पूर्व निदेशक और मुंबई स्थित निजी कंपनी के प्रबंधन पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है।
2020 में जब कोरोना महामारी चरम पर थी, उस दौरान सरकार ने 17 सरकारी कॉलेजों और एक सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए 2.59 लाख पीपीई किट और एन95 मास्क खरीदने के आदेश दिए थे, लेकिन आपूर्ति में गड़बड़ियां पाई गईं। आरोप है कि निविदा प्रक्रिया का पालन किए बिना किट और मास्क खरीदे गए, जिन अस्पतालों के लिए ये आपूर्ति की जानी थी, उन्हें सामग्री नहीं मिली। इसके अलावा कीमतों में मनमानी बढ़ोतरी और धोखाधड़ी से जुड़े सबूत भी मिले हैं।
एफआईआर में कहा गया है कि मुंबई की कंपनी ने धोखाधड़ी की प्रक्रिया को अंजाम दिया है। इसके लिए कुछ अधिकारियों ने इस कंपनी की मदद की। पुलिस ने बताया कि अभी तक किसी राजनेता का नाम सामने नहीं आया है, लेकिन जांच में पूर्व सरकार के कुछ राजनीतिक प्रतिनिधियों की भागीदारी की संभावना जताई जा रही है। कोरोना महामारी के चरम समय पर जब स्वास्थ्य कर्मियों को सुरक्षा उपकरणों की सबसे अधिक जरूरत थी, तब इस तरह के भ्रष्टाचार ने जनता का विश्वास हिला दिया। सरकारी आदेशों के बावजूद, अस्पतालों को उनकी जरूरत के उपकरण नहीं मिले। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इसमें शामिल अधिकारियों और कंपनियों की भूमिका की विस्तार से जांच की जा रही है।

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