आवेदक के विरूद्ध पंजीबद्ध अपराध में धाराएँ कम करने, गिरफ्तारी न करने एवं जल्दी चालान पेश करवाने के लिए के ऐवज में मांगी गई थी रिश्वत

दमोह! न्यायालय विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम दमोह श्री संतोष कुमार गुप्ता ने एक आवेदक के विरूद्ध पंजीबद्ध अपराध में धाराएँ कम करने, गिरफ्तारी न करने एवं जल्दी चालान पेश करवाने के ऐवज में रिश्वत मांगने वाले प्रधान आरक्षक को 4 साल के कठोर कारावास की सजा से दण्डित किया है!
अभियोजन के मुताबिक दिनांक 30.09.2017 को आवेदक लल्लू सिंह ने पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त सागर से शिकायत की थी कि उसके व उसके परिजनों के विरूद्ध थाना नोहटा में एस.सी./एस.टी. एक्ट के तहत रिपोर्ट लिखवाई थी, जिसके लिए थाना नोहटा के प्र०आर० चंद्रिका प्रसाद मुंडा ने दिनांक फोन करके आवेदक को थाना नोहटा बुलाया था, प्रकरण में पंजीबद्ध अपराध में धाराएँ कम करने, गिरफ्तारी न करने एवं जल्दी चालान पेश करवाने के लिए 50 हजार रूपये रिश्वत की मॉग की जा रही है। आवेदक रिश्वत नहीं देना चाहता था, बल्कि उसे रंगे हाथों पकड़वाना चाहता था!
आवेदक द्वारा की गई शिकायत की तस्दीक पश्चात ट्रेप का आयोजन किया गया आवेदक द्वारा अनावेदक से संपर्क कर रिश्वत मांग संबंधी बातचीत को रिकार्ड किया गया। मांगवार्ता के दौरान अनावेदक आवेदक से 30,000/- रूपये लेने को सहमत हो गया तथा 23000 रूपये उसी समय ले लिये गये शेष 7,000/- रूपये और लाने के लिए बोला गया एवं ट्रेप के दौरान आरोपी चंद्रिका प्रसाद मुडा से रिश्वत राशि 7000/- रूपया बरामद की गई विवेचना में संकलित भौतिक, मौखिक एवं इलेक्ट्रानिक अभिलेखीय साक्ष्य के आधार पर आरोपी के विरूद्ध अभियोग पत्र माननीय न्यायालय पेश किया गया। अभियोजन द्वारा दस्तावेजी साक्ष्य एवं मौखिक साक्ष्य व प्रस्तुत तर्को से सहमत होकर माननीय न्यायालय द्वारा कल पारित निर्णय में आरोपी चंद्रिका प्रसाद मुडा (तत्कालीन प्रधान आरक्षक थाना नोहटा, जिला दमोह को दोषसिद्ध पाते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन -2018 ) की धारा 07, धारा 13(1)बी सहपठित धारा 13(2)में दोषसिद्ध करते हुए 04 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1000 रूपये अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।
अभियोजन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक श्री अनंत सिंह ठाकुर द्वारा प्रभारी जिला अभियोजन अधिकारी श्री कैलाश चंद पटेल के मार्गदर्शन में की गई एवं प्रकरण में विवेचना निरीक्षक श्री संतोष कुमार जामरा एवं श्री विजय सिंह परस्ते द्वारा की गई एवं श्री विनय नामदेव द्वारा आवश्यक सहयोग किया गया।
