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पूर्व राष्ट्रपति के बेटे अभिजीत ने बहन की आलोचना का दिया जवाब
कोलकाता। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बेटे अभिजीत मुखर्जी ने अपनी बहन शर्मिष्ठा मुखर्जी की कांग्रेस पार्टी की आलोचना का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उनके पिता को सार्वजनिक जीवन में देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद समेत जो कुछ हासिल हुआ, वो कांग्रेस की बदौलत हुआ है। पूर्व सांसद मुखर्जी ने यह भी कहा कि उनके पिता का निधन कोविड काल में हुआ था और ऐसे में उस समय की कई पाबंदियों के चलते कांग्रेस कार्य समिति की बैठक बुलाकर श्रद्धांजलि नहीं दी गई थी, हालांकि बाद में कार्य समिति ने श्रद्धांजलि अर्पित की थी।
अभिजीत मुखर्जी ने कहा कि कांग्रेस भी रैली करना चाहती थी लेकिन ऐसा नहीं कर सकी। हालांकि, पीएम और राहुल गांधी आ गए। शर्मिष्ठा मुखर्जी ने दिल्ली में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के स्मारक के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के प्रस्ताव का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि जब उनके पिता का निधन हुआ तो कांग्रेस कार्य समिति ने शोक सभा नहीं की थी। उन्होंने कहा कि एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने मुझे बताया कि भारत के पूर्व राष्ट्रपतियों के लिए शोक सभा बुलाने की कोई परंपरा नहीं है। यह तर्क पूरी तरह से निराधार है। मुझे अपने पिता की डायरी से पता चला कि सीडब्ल्यूसी ने पूर्व राष्ट्रपति के आर नारायण के निधन पर एक शोक सभा आयोजित की थी। नारायणन और मेरे पिता ने स्वयं शोक संदेश का मसौदा तैयार किया।
अभिजीत मुखर्जी ने कहा कि कांग्रेस ने मेरे पिताजी को बनाया, इंदिरा जी ने बनाया। बाद में बाद राजीव गांधी, पी वी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह के समय उन्हें जिम्मदारी मिली। पिताजी जो बने, कांग्रेस की वजह से बने थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने उनके पिता को राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार नामित किया था। अभिजीत वर्ष 2021 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे, हालांकि कुछ महीने पहले उन्होंने कांग्रेस में वापसी की इच्छा जताई थी। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह जैसे व्यक्ति के निधन के बाद विवाद नहीं होना चाहिए था।
मुखर्जी ने कहा कि मनमोहन सिंह एक ऐसे अर्थशास्त्री थे, जिनके बारे में जितना बोला जाए कम है। मेरे पिताजी की भाषा में बोलूं, तो वह एक ‘परफेक्ट जेंटलमैन’ थे। मैंने मनमोहन सिंह को कभी गुस्सा होते हुए नहीं देखा था। निजी रूप से जब उनसे मिलता था, वह मुस्कराते थे। उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को अपने पैर पर खड़ा किया। आज जिस बड़ी अर्थव्यवस्था की बात की जा रही है उसकी नींव उन्होंने रखी थी।

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