Spread the love

कई सीटों पर टिकट न मिलने पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने पर्चे भरे हैं

नई दिल्ली। हरियाणा विधानसभा चुनाव जीतना भाजपा के लिए टेढी खीर होता जा रहा है। यहां 4 मंत्रियों समेत 15 विधायकों के भाजपा ने टिकट काट दिए है। इसके चलते उनमें नाराजगी बढ़ी और उन्होंने बगावती तेवर अपना लिए है। कुछ ने गुस्से में पार्टी ही छोड़ दी है। बागी नेताओं का आरोप है कि दूसरी पार्टी से आने वाले नेताओं को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है और सालों से भाजपा को समर्पित नेताओं की अनदेखी की जा रही है। हालात ये हैं कि बगावत और नाराजगी की वजह से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की दिक्कतें बढ़ी हैं। उनकी अपनी सीट भी आसान नहीं है और दूसरे उम्मीदवारों को जिताने का दबाब भी उन पर है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कई प्रमुख नेताओं के टिकट इसलिए भी कटे हैं, क्योंकि वह पूर्व मुख्यमंत्री तथा मौजूदा केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के विरोधी खेमे के माने जाते थे। साथ ही उनके ऐसे समर्थक भी टिकट पा गए हैं, जिनका भारी विरोध था।
दूसरे दलों खासकर कांग्रेस से आए नेताओं को पार्टी ने काफी तवज्जो दी है। कांग्रेस से आई किरण चौधरी को राज्यसभा में लाया गया और उनकी बेटी श्रुति चौधरी को विधानसभा टिकट भी गया। मूल रूप से कांग्रेसी रहे लेकिन काफी समय पहले भाजपा में आ चुके केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत की बेटी आरती भी टिकट हासिल करने में सफल रही। कांग्रेस से आए रमेश कौशिक के बेटे देवेंद्र कौशिक और कुलदीप बिश्नोई के बेटे भव्य बिश्नोई को भी टिकट मिल गया। ऐसे में भाजपा के भीतर नाराजगी बढ़ी है और बगावत से लेकर विरोध तक सामने आए हैं। कई सीटों पर टिकट न मिलने पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने पर्चे भरे हैं। हालांकि, पार्टी की कोशिश नाम वापसी तक कुछ को मनाकर उनको बिठाने की है। राज्य में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस में तालमेल नहीं हुआ है। दोनों अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। इनेलो और बसपा का गठबंधन भी चुनाव मैदान में है। जजपा आजाद समाज पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। अगर सामाजिक समीकरणों में भाजपा विरोधी वोटों का बंटवारा होता है तो उसके लिए कुछ सकारात्मक स्थिति बन सकती है। भाजपा के चुनाव अभियान का काफी दारोमदार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रचार पर टिका है। मोदी 15 सितंबर को कुरुक्षेत्र से प्रचार शुरू कर रहे हैं। पार्टी के सभी बड़े नेता राज्य में प्रचार करेंगे। कठिन हालात में भी भाजपा को कांग्रेस के भीतर के घमासान से कुछ लाभ मिलने की संभावना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *