
हाईकोर्ट की फुल बेंच करेगी फैसला
ग्वालियर। हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने भ्रष्ट अधिकारियों के अभियोजन स्वीकृति के मामले को हाईकोर्ट की फुल बेंच के सामने भेज दिया है। अब इस मामले की सुनवाई फुल बेंच में होगी।
ग्वालियर खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार रोकने के लिए लोकायुक्त संगठन का गठन किया गया है। लोकायुक्त और उप लोकायुक्त एक स्वतंत्र निकाय हैं। भ्रष्टाचार के मामले की जांच करते हैं। यदि भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय में मामला नहीं चलता है। इस कारण से लोकायुक्त अधिनियम 1981 का मूल उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा। सरकार यदि अभियोजन की स्वीकृति नहीं देती है। तो यह माना जाएगा, सरकार ने ऐसे बाघ की नियुक्ति की है। जो बिना दांत का है। डरा तो सकता है, लेकिन काट नहीं सकता है। ऐसी स्थिति में भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई होगी आसानी से समझा जा सकता है।
लोकायुक्त द्वारा दोषी पाए जाने के बाद मामला न्यायालय में ले जाने के लिए शासन से अभियोजन की स्वीकृति लेनी पड़ती है। इस मामले में हाईकोर्ट की विभिन्न बैंच के कई विरोधाभासी आदेश हैं। ऐसी स्थिति में यह याचिका फुल बेंच को ट्रांसफर कर दी गई है।
