
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिए निर्देश
नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने देश भर की अदालत परिसरों और ट्रिब्यूनल्स में महिलाओं, विशेष रूप से सक्षम व्यक्तियों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए शौचालय सुविधाओं के निर्माण को लेकर सख्त आदेश दिया है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने यह महत्वपूर्ण फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे शौचालयों के निर्माण, रखरखाव और साफ-सफाई के लिए पर्याप्त धनराशि प्रदान करें। इन सुविधाओं की समय-समय पर समीक्षा के लिए हाईकोर्ट की ओर से एक समिति का गठन होगा। शीर्ष अदालत ने सभी राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और उच्च न्यायालयों को चार महीने की अवधि के भीतर मामले में अपनी स्टेटस रिपोर्ट देने को कह दिया है।
जस्टिस पारदीवाला ने मौखिक रूप से चेतावनी दी कि अगर इन निर्देशों का पालन नहीं हुआ, तब अदालत अवमानना की कार्रवाई होगी। नवंबर 2024 में जब यह मामला पेंडिंग था और सुनवाई के बाद फैसला दिया गया है। शीर्ष अदालत ने इस पर असंतुष्टि जाहिर की है कि कई अदालतों में महिला न्यायिक अधिकारियों के लिए भी निजी शौचालय उपलब्ध नहीं हैं। महिला, वकील, और न्यायिक अधिकारियों के लिए अलग शौचालय सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि महिला शौचालयों में सैनिटरी नैपकिन डिस्पेंसर की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं। इन सुविधाओं के रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जाए।
