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जबलपुर ! प्रदेश प्रगतिशील ब्राह्मण महासभा के तत्वाधान में रविवार को सुबह 10:00 बजे से गढ़ा संजीवनी नगर स्थित लाल मैदान में आयोजित किया गया इस आयोजन में 101 विप्र बालकों का यज्ञोपवीत संस्कार कर्मकांडी विद्वानों की के द्वारा वैदिक विधि से किया गया। इस आयोजन में संत शिरोमणि डॉ राजेश्वर चैतन्य ब्रहमचारी महाराज जी ने उद्बोधन देते बताया कि जनेऊ तीन धागों वाला एक सूत्र होता है जिसे पुरुष अपने बाएं कंधे के ऊपर से दाईं भुजा के नीचे तक पहनते हैं। इसे देवऋण, पितृऋण और ऋषिऋण का प्रतीक माना जाता है, साथ ही इसे सत्व, रज और तम का भी प्रतीक माना गया है। यज्ञोपवीत के एक-एक तार में तीन-तीन तार होते हैं। यज्ञोपवीत के तीन लड़, सृष्टि के समस्त पहलुओं में व्याप्त त्रिविध धर्मों की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करते हैं। इस तरह जनेऊ नौ तारों से निर्मित होता है। ये नौ तार शरीर के नौ द्वार एक मुख, दो नासिका, दो आंख, दो कान, मल और मूत्र माने गए हैं। इसमें लगाई जाने वाली पांच गांठें ब्रह्म, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का प्रतीक मानी गई हैं। बुरे संस्कारों का नाश करके अच्छे संस्कारों को स्थाई बनाने के लिए यज्ञोपवीत-संस्कार किया जाता है। मनु महाराज के अनुसार, यज्ञोपवीत संस्कार हुए बिना द्विज किसी कर्म का अधिकारी नहीं होता। द्विज का अर्थ होता है दूसरा जन्म। ये संस्कार होने के बाद ही बालक को धार्मिक कार्य करने का अधिकार मिलता है। व्यक्ति को यज्ञ करने का अधिकार प्राप्त हो जाना ही यज्ञोपवीत है। पदम् पुराण के अनुसार करोड़ों जन्म में किए हुए पाप यज्ञोपवीत धारण करने से नष्ट हो जाते हैं। विशेष उपस्थिति एवं मार्गदर्शन रहेगा। संस्कार कार्यक्रम में मुन्ना सिंह अमरीश मिश्रा युवा नगर अध्यक्ष गुड्डा त्रिपाठी नवीन शुक्ला आशीष त्रिवेदी असीम त्रिवेदी संजय तिवारी सिद्धार्थ शुक्ला रत्नेश मिश्रा विकास तिवारी विकास गौतम अरुण दिक्षित प्रिया तिवारी रेणु उपाध्याय संध्या बेरागी मांडवी दुबे रश्मि शर्मा ज्योति उपाध्याय शैलेश पाठक गुड्डा महाराज धीरेंद्र मिश्रा जे पी तिवारी सुशील तिवारी आदि उपस्थित थे।

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