
हाई कोर्ट ने सीधी के पुलिस अधीक्षक को दिए निर्देश
जबलपुर। हाई कोर्ट ने मझौली के कालेज में पदस्थ डा. रामजस चौधरी को आरएसएस ज्वाइन करने के लिए बाध्य करने और मारपीट के मामले में पुलिस अधीक्षक सीधी को कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार की ओर से अंडरटेकिंग दी गई है कि इस मामले में पुलिस अधीक्षक सीधी को शिकायतों पर विचार करने और जांच करने का निर्देश देंगे। यदि धमकी सहित अन्य आरोप सही पाए जाते हैं तो सात दिन के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने राज्य शासन की अंडरटेकिंग को रिकार्ड पर लेते हुए याचिका का पटाक्षेप कर दिया।
याचिकाकर्ता डा. रामजस चौधरी शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, मझौली, जिला सीधी में अतिथि प्राध्यापक (वाणिज्य) के पद पर कार्यरत है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर एवं विनायक प्रसाद शाह ने दलील दी कि याचिकाकर्ता को महाविद्यालय प्रशासन द्वारा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की गतिविधियों में शामिल होने के लिए बाध्य किया जा रहा है। याचिकाकर्ता की विचारधारा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की विचारधारा से मेल नहीं खाती है। जब याचिकाकर्ता ने आरएसएस की गतिविधियों में शामिल होने से मना किया तो उसके साथ मारपीट की गई और धमकी दी गई। याचिकाकर्ता के सिर पर हत्या का खतरा मंडरा रहा है। इस संबंध में याचिकाकर्ता ने पुलिस अधीक्षक सीधी और संबंधित पुलिस इंस्पेक्टर को शिकायत की थी, लेकिन इन शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसलिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ता ने कालेज की प्राचार्य गीता भारती, उनके पति एसआर भारती, सहायक अध्यापक राजकिशोर तिवारी, संदीप कुमार शर्मा, विपेंद्र द्विवेदी, डा.सुरेश तिवारी, आरएसएस कार्यकर्ता मनीष सोनी, रीतेश पांडे, शिवम मिश्रा, आर्यन पांडे, अमन गहरवार, निल्य मिश्रा, गंगा सागर चतुर्वेदी, रामकुमार गुप्ता, अभिनव द्विवेदी, अमन जायसवाल, शिवांश सिंह गहरवार, अमित केवट एवं पंकज तिवारी पर आरोप लगाए हैं। दलील दी गई कि इन सभी के एक राय होकर याचिका कर्ता को आरएसएस ज्वाइन करने, उनके आयोजनों में आर्थिक सहयोग करने और शामिल होने लगातार दबाव बनाया। इनकार करने पर उस पर हमला भी किया।
