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अमेरिका से प्रत्यर्पण की मंजूरी मिली
मुंबई। मुंबई में हुए 9/11 आतंकी हमले के दोषी तहव्वुर राणा को भारत लाना आसान हो गया है। इसकी वजह ये है कि अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने प्रत्यर्पण की मंजूरी दे दी है। भारत ने प्रत्यर्पित करने के निचली अदालत के फैसले की समीक्षा करने की अपील की थी। उन्होंने दोहरे खतरे के सिद्धांत का हवाला दिया, जो किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए 2 बार मुकदमा चलाने या दंडित करने से रोकता है। मगर, एससी ने आज अपने फैसले में उसके तर्क को ठुकरा दिया।
अमेरिकी सॉलिसिटर जनरल एलिजाबेथ बी प्रीलोगर ने 16 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज करने का आग्रह किया था। राणा के वकील जोशुआ एल ड्रेटल ने 23 दिसंबर को अपने जवाब में अमेरिकी सरकार की सिफारिश को चुनौती दी और कोर्ट से गुहार लगाई कि उनकी याचिका स्वीकार की जाए। एक लंबी कानूनी लड़ाई में यह राणा के लिए भारत प्रत्यर्पित न किए जाने का आखिरी कानूनी मौका था। मगर, अब वह इसे भी खो चुका है और राणा को भारत लाने का रास्ता साफ हो गया है।
तहव्वुर राणा पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक है। भारत लंबे समय से उसके प्रत्यर्पण की मांग करता रहा है, क्योंकि वह 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के मामले में वांटेड है। तहव्वुर राणा इस समय लॉस एंजिल्स की जेल में बंद है। उस पर मुंबई हमलों की साजिश से जुड़े होने के आरोप हैं। उसे पाकिस्तानी-अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली से जुड़ा माना जाता है जो 26/11 मुंबई हमलों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक है। तहव्वुर राणा निचली अदालतों और सैन फ्रांसिस्को में उत्तरी सर्किट के लिए अमेरिकी अपील न्यायालय सहित कई संघीय अदालतों में कानूनी लड़ाई हार चुका था। इसके बाद, उसने 13 नवंबर को अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के समक्ष याचिका दायर की थी।

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