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लखनऊ। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़े घटनाक्रम के तहत महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। यह फैसला राम मंदिर दान प्रकरण में सामने आई कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर जारी एसआईटी जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख के बाद हुआ है। इन इस्तीफों को जांच में हुई कठोर कार्रवाई और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के प्रयासों से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके पहले, इसी मामले में ट्रस्ट की शिकायत पर आठ लोगों के खिलाफ पहली एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है, जिसमें से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।


सूत्रों के अनुसार, एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कठोर संस्तुतियां की गई थीं, जिसके बाद योगी सरकार ने तेजी से कार्रवाई की। एसआईटी कथित वित्तीय अनियमितताओं की गहन पड़ताल कर रही है, जिसमें आरोपियों के बैंक खातों, संपत्तियों, मोबाइल रिकॉर्ड और संदिग्ध लेन-देन की जांच शामिल है। मुख्यमंत्री योगी ने इस मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के संकेत दे दिए थे, यह सुनिश्चित करते हुए कि अनियमितता पाए जाने पर किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
यह मामला ट्रस्ट के नए सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर राम जन्मभूमि थाने में दर्ज हुआ था। कृष्ण मोहन, जो सितंबर 2025 में ट्रस्टी बने थे, ने रामशंकर यादव उर्फ टीनू, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडेय, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव को नामजद किया है। इन सभी पर गबन, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ है। एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) को सौंपे जाने के बाद यह कार्रवाई हुई।
इस्तीफा देने वाले चंपत राय विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के एक वरिष्ठ नेता थे और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। राम मंदिर आंदोलन से लेकर निर्माण और संचालन तक उनकी गहरी भागीदारी रही। इतना ही नहीं ट्रस्ट के प्रशासनिक कामकाज, वित्तीय प्रबंधन और दैनिक व्यवस्थाओं की निगरानी उन्हीं के जिम्मे थी। जांच में सामने आया है कि उनके करीबी और ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू श्रद्धालुओं की दर्शन और दान संबंधी व्यवस्थाओं को देखते थे, जो एफआईआर में नामजद मुख्य आरोपियों में से एक है।
वहीं, डॉ. मिश्रा अयोध्या के जाने-माने चिकित्सक और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से लंबे समय से जुड़े रहे थे। वे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के संस्थापक ट्रस्टियों में से थे। ट्रस्ट में उन्हें चढ़ावे की नकद गिनती, सुरक्षित भंडारण और बैंक में जमा कराने की व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मंदिर परिसर की साफ-सफाई और कुछ अन्य व्यवस्थाएं भी उनके कार्यक्षेत्र में थीं।

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