
प्रवेश के लिए अब सेल्फी अनिवार्य
भोपाल। प्रदेश में इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों के प्रति छात्रों का रुझान तेजी से कम हो रहा है। आलम यह है कि प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में आधे से अधिक सीटें खाली पड़ी हैं। तकनीकी शिक्षा विभाग ने इन खाली सीटों को भरने के लिए कॉलेज लेवल काउंसलिंग (सीएलसी) का दूसरा राउंड शुरू किया है, जिसमें प्रवेश के दौरान छात्र को सेल्फी लेकर पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है। तकनीकी शिक्षा विभाग का दावा है कि फर्जीवाड़े पर रोक लगाने और यह सुनिश्चित करने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है कि प्रवेश लेने वाला छात्र वास्तव में कॉलेज में मौजूद है।
विभाग के आंकड़ों के अनुसार, द्वितीय काउंसलिंग तक प्रदेश के 135 इंजीनियरिंग संस्थानों की कुल 75,249 सीटों में से केवल 35,660 पर ही प्रवेश हुआ है। इस प्रकार, अभी भी 39,589 सीटें खाली हैं। राजधानी भोपाल के ही आधा दर्जन से अधिक इसरतह के इंजीनियरिंग कॉलेज हैं, जहां अब तक एक भी छात्र ने प्रवेश नहीं लिया है और उन्हें अब सीएलसी राउंड से ही उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इंजीनियरिंग में छात्रों के मोहभंग के पीछे कई कारण हैं, जिसमें प्लेसमेंट के अवसरों में लगातार कमी और पारंपरिक ब्रांचों में घटती रुचि प्रमुख हैं। छात्र अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग (एमएल) और ई-मोबिलिटी जैसी आधुनिक ब्रांचों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं, इसकारण कॉलेजों पर नए पाठ्यक्रम शुरू करने का दबाव बढ़ गया है। इन हालातों के चलते पिछले एक दशक में प्रदेश के 64 इंजीनियरिंग कॉलेजों पर ताला लग चुका है, और पिछले साल भी 754 सीटें सरेंडर की गई थीं।
