इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त आदेश

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बालिग बेटियों को कथित तौर पर जबरन अवैध हिरासत में रखने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने दोनों पीड़ित बहनों को कुल 25 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह मामला दोनों बहनों की ओर से दाखिल की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से जुड़ा है।
जानकारी के मुताबिक, दोनों सगी बहनों ने हिंदू धर्म से इस्लाम धर्म अपनाया था। इसके बाद उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध हिरासत में रखे जाने का आरोप सामने आया। मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि दोनों के मौलिक अधिकारों का गैरकानूनी तरीके से हनन हुआ है। अदालत ने इस आधार पर उन्हें मुआवजा देने का आदेश दिया।
अदालत के आदेश के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार और दोनों लड़कियों के पिता को मुआवजे के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। मुआवजे की राशि फैसले की तारीख से आठ सप्ताह के भीतर चुकानी होगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मुआवजा देने के बाद राज्य सरकार को उसकी 50 प्रतिशत राशि दोनों लड़कियों के पिता से और शेष 50 प्रतिशत उस दोषी सरकारी कर्मचारी से वसूलने का अधिकार होगा, जिसकी कार्रवाई या लापरवाही के कारण लड़कियों की स्वतंत्रता का असंवैधानिक हनन हुआ।
यह फैसला न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने सुनाया। अदालत के आदेश को पीड़ित बहनों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। वहीं, अभी तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की ओर से इस फैसले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
