यूनिफॉर्म की आपूर्ति मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से किया जवाब – तलब

जबलपुर। मप्र उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश वी.के. अग्रवाल और न्यायाधीश प्रदीप मित्तल की संयुक्तपीठ ने सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को वितरित की जाने वाली यूनिफॉर्म (स्कूल ड्रेस) की आपूर्ति के लिए मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा जारी 350 करोड़ रुपये के टेंडर को अंतिम रूप देने पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया मामले को सुनवाई योग्य मानते हुए राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से एक सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। संयुक्तपीठ ने यह अंतरिम आदेश उन तीन याचिकाओं पर पारित किया, जिनमें टेंडर प्रक्रिया को मध्य प्रदेश भंडार क्रय नियम, 2023 के विपरीत बताते हुए चुनौती दी गई है।
अल्पसंख्यक पिछड़ा वर्ग पावरलूम बुनकर संघ, जबलपुर, पैराडाइज बुनकर संघ, बुरहानपुर तथा कोहिनूर बुनकर संघ, जबलपुर की ओर से दायर याचिकाओं में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 1993 से राज्य स्तरीय पावरलूम सहकारिता समिति को पूरे प्रदेश में स्कूल यूनिफॉर्म की आपूर्ति के लिए नोडल एजेंसी के रूप में नियुक्त किया गया है। दायर याचिका में दावा किया गया है कि मध्य प्रदेश भंडार क्रय नियम, 2023 के अनुसार स्कूल ड्रेस की खरीद राज्य उपक्रमों से बिना टेंडर के किए जाने का प्रावधान है। इसके बावजूद 3 जून 2026 को मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम ने 350 करोड़ रुपये का खुला टेंडर जारी कर दिया, जो नियमों के विपरीत और अवैध है। दायर याचिकाओं में यह भी कहा गया है कि इस टेंडर के कारण पिछले लगभग 30 वर्षों से पावरलूम और स्पिनिंग मिल उद्योग से जुड़े करीब 2 लाख बुनकर परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार अधिकांश बुनकरों ने अपने उद्योग संचालन के लिए बैंकों से भारी ऋण ले रखा है और यदि टेंडर प्रक्रिया लागू होती है तो वे गंभीर आर्थिक संकट में आ सकते है| कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली संयुक्तपीठ ने याचिकाओं पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद 350 करोड़ रुपये के टेंडर को अंतिम रूप देने पर अंतरिम रोक लगाने के साथ ही राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता श्रेयस धर्माधिकारी एवं अधिवक्ता तीर्थेश भारिल्ल ने पक्ष रखा।
