
इन्दौर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हेमंत कुमार रघुवंशी की कोर्ट ने दोहरे हत्याकांड प्रकरण की सुनवाई उपरांत मुख्य आरोपी डीजे उर्फ धनंजय उर्फ शुभांशु यादव को दोषी करार देते दोहरे आजीवन कारावास के साथ अन्य गंभीर धाराओं में भी अलग-अलग सजा सुनाते 33 हजार रुपए के अर्थदंड से भी दंडित किया है। अभियोजन कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि ऋषभ शर्मा निवासी रूक्मणी नगर ने एरोड्रम थाना पुलिस को पुलिस को सूचना दी थी कि उसके माता-पिता ज्योतिप्रसाद शर्मा और नीलम शर्मा रात में सोने गए थे, जबकि वह दादा-दादी के घर रुक गया था। सुबह जब वह माता-पिता को उठाने पहुंचा तो घर का दरवाजा नहीं खुला। काफी प्रयास के बाद उसने खिड़की से देखा कि पिता खून से लथपथ फर्श पर पड़े हैं और मां बिस्तर पर मृत अवस्था में थी। ताला तोड़कर अंदर पहुंचने पर दोनों की धारदार हथियार से हत्या की पुष्टि हुई। वारदात 16-17 दिसंबर 2020 की थी। पुलिस को मौके पर मृतकों की नाबालिग बेटी की कॉपी मिली थी। इसमें हाथ से लिखा था कि मैंने ही अपने माता-पिता को मारा है, मुझे ढूंढने का प्रयास न किया जाए। शुरुआती तौर पर यह नोट जांच को भटकाने वाला माना था। पुलिस ने जब घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों का फुटेज देखा तो एक संदिग्ध युवक घर में आता-जाता दिखा। उसकी पहचान मृतकों की नाबालिग बेटी के दोस्त धनंजय के रूप में हुई। पुलिस ने धनंजय और उसके एक नाबालिग साथी को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो दोनों ने हत्या की बात कबूली।
वैज्ञानिक सबूतों के साथ 25 गवाहों के बयान और सबूत कोर्ट में पेश किए गए
पुलिस को जांच और पूछताछ में यह पता चला कि उसने मृतकों की नाबालिग बेटी के प्यार में उसके माता-पिता की घर में घुसकर धारदार हथियारों से हत्या कर दी थी। जिसके बाद उसे और उसके नाबालिग साथी को गिरफ्तार कर विवेचना उपरांत प्रकरण चालान कोर्ट में पेश किया गया। विशेष लोक अभियोजक आरती भदौरिया के अनुसार प्रकरण चालान में वैज्ञानिक सबूतों के साथ 25 गवाहों के बयान और सबूत कोर्ट में पेश किए गए थे। जिसके आधार पर सक्षम न्यायालय ने आरोपी धनंजय को दो हत्याओं में दोहरा आजीवन कारावास, रात को घर में घुसने की धारा में 10 साल, घातक – हथियारों के साथ लूट की धारा में सात वर्ष और अवैध तरीके से धारदार हथियार रखने के आरोप में 1साल की सजा सुनाई है। वहीं प्रकरण में आरोपी बाल अपचारी के खिलाफ अलग से चालान पेश किया गया है।
