Spread the love

सात हजार से अधिक वैज्ञानिक अध्ययनों की समीक्षा

लंदन। कई लोगों का विश्वास था कि रोजाना थोड़ी शराब पीने से दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है और जीवन लंबा हो सकता है। हालांकि अब तक उपलब्ध शोधों में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो कि कम मात्रा में शराब पीना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। शोधकर्ताओं ने शराब और स्वास्थ्य से जुड़े सात हजार से अधिक वैज्ञानिक अध्ययनों की समीक्षा की। इस विश्लेषण में यह स्पष्ट नहीं हो सका कि हल्के या मध्यम स्तर पर शराब का सेवन करने से मृत्यु का जोखिम घटता है या स्वास्थ्य में कोई विशेष सुधार होता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, पहले किए गए कई अध्ययनों में ऐसी पद्धतिगत कमियां थीं, जिनके कारण यह धारणा बनी कि सीमित मात्रा में शराब पीना फायदेमंद है। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती शोधों में उन लोगों को भी शराब न पीने वालों की श्रेणी में शामिल कर लिया गया था, जिन्होंने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण शराब छोड़ दी थी। इससे परिणाम प्रभावित हुए और ऐसा प्रतीत हुआ कि शराब न पीने वाले लोगों का स्वास्थ्य अपेक्षाकृत कमजोर है, जबकि वास्तविक स्थिति अलग हो सकती थी। नए शोध बताते हैं कि शराब की मात्रा बढ़ने के साथ स्वास्थ्य जोखिम भी बढ़ते जाते हैं। यहां तक कि सीमित मात्रा में सेवन करने पर भी जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं होता। इसके अलावा, शराब पीने का तरीका भी महत्वपूर्ण माना गया है। यदि कोई व्यक्ति सप्ताहभर शराब न पीकर सप्ताहांत में एक साथ कई ड्रिंक लेता है, तो सड़क दुर्घटनाओं, चोट, अल्कोहल विषाक्तता, हृदय की धड़कन में गड़बड़ी और कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, शराब केवल यकृत को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि इसे 200 से अधिक बीमारियों और स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़ा गया है। इनमें उच्च रक्तचाप, स्ट्रोक, हृदय रोग, लिवर सिरोसिस, अग्नाशयशोथ तथा मुंह, गले, भोजन नली, स्तन और लिवर के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां शामिल हैं। हालांकि शोधकर्ता यह भी स्पष्ट करते हैं कि इसका अर्थ यह नहीं है कि शराब पीने वाला हर व्यक्ति बीमार होगा। लेकिन उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण यही संकेत देते हैं कि शराब का सेवन जितना कम होगा, उससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिम भी उतने ही कम रहेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *