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अशोकनगर। जिले में कालोनाइजों द्वारा काटी गई कालोनियों में दबी शासकीय भूमि की जांच हेतु कलेक्टर सुभाष कुमार द्विवेदी ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की अध्यक्षता में विशेष टीम तैयार की गई है। यह जिले में काटी गई कालोनियों में शासकीय भूमि के रकबा की जांच करेगी। जिसका आदेश शुक्रवार को जारी किया गया है। दरअसल, केन्द्रीय मंत्री एवं सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा दिशा बैठक के दौरान भू-माफियाओं के विरुद्ध कार्यवाही किये जाने के निर्देश दिये गये थे। उक्त निर्देशों के क्रम में कलेक्टर सुभाष कुमार द्विवेदी द्वारा जिले में कॉलोनाईजरों द्वारा जो कॉलोनियां काटी गई है उनमें शासकीय भूमि का रकबा तो सम्मिलित नहीं है। इसकी जांच हेतु जांच दल गठित कि गये हैं। अनुभाग अशोकनगर अंतर्गत तहसील अशोकनगर प्रभारी तहसीलदार रोहित रघुवंशी, वृत राजपुर के लिये नायब तहसीलदार मयंक तिवारी, वृत कचनार के लिये नायब तहसीलदार शंभू सिंह मीणा, शाढौरा के लिये प्रभारी तहसीलदार सुनील सिंह भदौरिया, वृत जलालपुर एवं वृत बरखेडा नई के लिये प्रभारी नायव तहसीलदार शाढौरा मुकेश कुमार दुबे को नियुक्त किया गया है। अनुभाग ईसागढ अंतर्गत तहसील ईसागढ एवं वृत सारसखेडी के लिये प्रभारी तहसीलदार कमल सिंह कोली, वृत कदवाया के लिये प्रभारी नायव तहसीलदार घनश्याम शर्मा, नईसराय के लिये प्रभारी तहसीलदार लक्ष्मी प्रसाद अहिरवार, वृत अमरोद सिंगराना के लिये नायव तहसीलदार सत्य प्रकाश शुक्ला, वृत महिदपुर के लिये नायव तहसीलदार अरूण गुर्जर को नियुक्त किया गया है। अनुभाग चंदेरी अंतर्गत तहसील चंदेरी एवं वृत विक्रमपुर के लिये प्रभारी तहसीलदार दिलीप दरोगा, वृत थूबोन के लिये प्रभारी नायव तहसीलदार अशोक सिंह तोमर को नियुक्त किया गया है। अनुभाग मुंगावली अंतर्गत तहसील मुंगावली के लिये प्रभारी तहसीलदार दीपक यादव, वृत वम्मन खिरिया के लिये नायव तहसीलदार सुरेश राठौर, वृत पिपरई एवं वृत नानौन के लिये तहसीलदार साहिर खान, वृत तारई के लिये नायव तहसीलदार अनीष धाकड, बहादुरपुर के लिये तहसीलदार दीपक शुक्ला, वृत घाटबमुरिया प्रभारी नायव तहसीलदार आनंद जैन, वृत अथाईखेडा के लिये नायव तहसीलदार अशोक कुमार गौतम को नियुक्त किया गया है। साथ ही अधिकारीगण अपने अपने क्षेत्र अंतर्गत कॉलोनियों का सीमांकन एवं निरीक्षण करने हेतु राजस्व निरीक्षक एवं पटवारियों दल गठित किया जाकर निरीक्षण प्रतिवेदन 15 दिवस में प्रस्तुत सुनिश्चित करेगे। साथ ही इस आशय का प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत करेगें कि मेरे क्षेत्र अंतर्गत किसी भी कॉलोनी में शासकीय रकबा नम्बर पर कॉलोनी नहीं काटी गई अथवा शासकीय नम्बर को आंशिक पूर्णत: सम्मिलित नहीं किया गया है।
बिना डायवर्सन के बसा दीं कई कॉलोनियां:
शहर में दो-चार कॉलोनी छोड़ दिया जाये तो ज्यादातर कालोनियों अवैध हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि प्रशासन ने यहां कॉलोनियां बनाने वाले कॉलोनाइजरों की मनमानी को लेकर कार्रवाई नहीं की है। कॉलोनाइजरों ने औने-पौने दाम पर किसानों से जमीन खरीदीं, इनका डायवर्सन नहीं कराया और न ही टीएंडसीपी से नक्शा पास कराया। सीधे-सीधे प्लॉट काटकर कॉलोनियां बसा दीं। खास बात है कि अवैध रूप से बसी इन कॉलोनियों में शहर की एक चौथाई आबादी प्लाट खरीदकर मकानों का निर्माण करा चुकी है। इन्हीं कॉलोनियों में निवास भी कर रही है। जिन्हे खामियाजा उठाना पड़ रहा है।
इन नियमों का पालन करना जरूरी:
शहर में जहां भी नवीन कॉलोनियां काटी जा रही हैं, उनका सबसे पहले राजस्व विभाग में डायवर्सन होना चाहिए, लेकिन कॉलोनाइजर रजिस्ट्रेशन फीस से बचने के चक्कर में डायवर्सन नहीं कराते हैं, जिससे राजस्व की चोरी खुलेआम की जा रही है। कॉलोनी में नियमावली के अनुसार पक्की रोड, नाली, पानी की सुविधा, बिजली, खंबों पर स्ट्रीट लाइट, पार्क आदि की सुविधाएं होनी चाहिए। मगर कॉलोनाइजर खेतों में कच्ची रोड डालकर प्लाट काट देते हैं। बयनामा के दौरान भी उपपंजीयक ऑफिस में यह लिखा जाता है कि जांच उपरांत जमीन बंधक नहीं पाई गई है। पर सर्विस प्रोवाइडर और रजिस्ट्रार इस पर कतई ध्यान नहीं देते हैं।

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